यहां अपनी पहचान बनाने के लिए तरस रहे मोदी!
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शाम की चहल पहल के बीच चेन्नई के बाजार से गुजरते हुए सामान ढोने वाली एक गाड़ी दिखती है, जिस पर छोटे लाउडस्पीकर से तमिल में कोई गाना बज रहा है।
गाड़ी के ऊपर किसी पार्टी का झंडा लगा है। टैक्सी ड्राइवर तमिल स्टाइल अंग्रेजी में बताता है कि कांग्रेस का चुनाव प्रचार हो रहा है।
गाड़ी के पास पहुंचकर उसने अचानक मेरे ऊपर एक सवाल दागा, क्या गुजरात में शराब की कोई दुकान नहीं है? मैंने पूछा- क्यों? उसने कहा, आगे वाली प्रचार गाड़ी में तमिल में जो गाना बज रहा है उसमें यही कहा जा रहा है।
चेन्नई जैसी जगह में अभी पहचान की दरकार
टैक्सी ड्राइवर ने फिर सवाल किया- ‘मोढी’ का कोई परिवार नहीं है? उसके मुताबिक गाने में तो यही बताया जा रहा है कि ‘मोढी’ सिर्फ ‘पॉलिटिक्स’ के लिए और गुजरात की जनता के लिए काम करता है।
अब मैंने ड्राइवर से पूछा- तुम मोदी को जानते हो? न में सर हिलाते हुए उसने कहा, अभी हाल में यहां आया था तो हमारे रजनीकांत से मिला था। उसके लिए ‘मोढी’ की बस यही पहचान है।
सामने की गाड़ी पर भाजपा का झंडा उसे कांग्रेस जैसा लगता है जबकि उस पर दोनों तरफ किसी स्थानीय नेता के साथ नरेंद्र मोदी का पोस्टर भी लगा है। यह उसकी अज्ञानता नहीं है। ‘मोढी’ भले ही गानों से अपनी पहचान बना लें, चेन्नई जैसी जगह में उनकी भारतीय जनता पार्टी को अभी पहचान की दरकार है।
'नरेंद्र मोदी के बारे में ज्यादा पता नहीं'
लगभग 13 किलोमीटर में फैले दुनिया के दूसरे सबसे लंबे समुद्र तट मरीना बीच पर मेले जैसी स्थिति है। गुड फ्राइडे की छुट्टी का आनंद लेने जुटे लोगों को चुनाव की जीत- हार से क्या लेना देना?
कुछ ऐसा ही भाव दिखाया लोगों ने। कौन जीतेगा? ज्यादा कुरेदा तो झट ‘एआईएडीएमके’ (अन्नाद्रमुक) कह पीछा छुड़ा लिया। एमजीआर के समाधिस्थल के पास समुद्र किनारे रेत पर काफी दूर तक बसी दुकानों में भी बात करते हुए नरेंद्र मोदी पर सवाल उछाला तो कई ने बताया- सुना तो है लेकिन ज्यादा नहीं पता।
जब उन्हें बताया कि पीएम की कुर्सी के दावेदार हैं तो उन लोगों ने मुझसे ही सवाल किया, क्या बहुत पावरफुल आदमी है? सवाल करने वाले ये वे लोग हैं जो वोट डालने जाते हैं, ड्राइंग रूम में टीवी देखकर हार-जीत तय नहीं करते।
जयललिता की पार्टी के लिए रास्ता साफ
एम. करुणानिधि के द्रमुक (डीएमके) को लेकर किए सवालों पर लोग सिर्फ मुंह बनाकर भाव प्रगट करते हैं। एक साल में यहां समंदर की लहरें असंख्य हिचकोले ले चुकी हैं फिर भी द्रमुक का दाग धुला नहीं है।
शायद यही कारण है कि लोग सिर्फ एक पार्टी का नाम लेकर खिसक जाते हैं। अगर इनके इशारों पर भरोसा किया जाए तो विधानसभा की ही तरह इस लोकसभा चुनाव में भी तमिलनाडु की राजधानी में जयललिता की पार्टी के लिए रास्ता साफ है। क्यों? इसका सही जवाब या तो उनके पास है नहीं या वे बात नहीं करना चाहते हैं।
लोग कहते हैं पोल तो 24 (अप्रैल) को है। ऐसे में वोट का सवाल यहां बीच की सैर पर आए लोगों को अपनी मौज मस्ती में खलल लगता है और दुकानदारों को अपने धंधे की पड़ी है। मरीना बीच पर चारों तरफ कचरा बिखरा है।
सामने सारे सरकारी ऑफिस और बगल में सचिवालय, जिसके बारे में बड़े गर्व से लोग कहते हैं सीएम यहीं बैठती हैं। फिर ऐसा हाल क्यों है? एक दुकानदार कहता है- सर, नो रूल, पॉकेट फुल, यही होता है यहां। इस गंदगी के लिए भी वह सबसे ज्यादा जिम्मेदार सीएम को मानता है, क्योंकि उसके लिए सीएम ही सब कुछ है। फिर भी सीएम की पार्टी ही जीतेगी? इस पर किसी तर्क की जरूरत नहीं।
आम आदमी पार्टी से जे. प्रभाकर मैदान में
मरीना बीच से सटे इलाके (चेन्नई सेंट्रल सीट) से ही पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन तीसरी बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ये द्रमुक सुप्रीमो एम. करुणानिधि के परिवार के हैं, लेकिन आजकल इनकी पहचान देश के सबसे बड़े 2जी घोटाले में नाम शामिल होने के कारण है।
ए राजा और कनिमोझी के साथ सीबीआई जांच के घेरे में आने के बाद इन्हें केंद्रीय मंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। हालांकि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रही आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी सामाजिक कार्यकर्ता जे. प्रभाकर इसी के बूते उन्हें मात देने उतरे हैं, लेकिन यहां लोगों के मूड से साफ है कि हार- जीत का फैसला सिर्फ इस घोटाले के कारण नहीं होगा।
फैसले पर पूरे प्रदेश का मूड हावी है। पिछली बार विधानसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र की अधिकांश सीटें द्रमुक के हाथ से निकल गई थीं।
चेन्नई में मुकाबला द्रमुक-अन्नाद्रमुक
अब भी जयललिता के अन्नाद्रमुक का जादू यहां कम नहीं हुआ है। कांग्रेस अपनी पहचान कायम रखने के लिए टक्कर देने की जोर आजमाइश कर रही है। भाजपा के सतरंगे गठबंधन से डीएमडीके के प्रत्याशी भी इस अखाड़े में खुद को कमजोर नहीं मान रहे हैं।
केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने की उम्मीद और चेन्नई में मोदी की चुनावी गोटियां बैठाने की तरकीबों पर इस ‘रेनबो’ गठबंधन ने मारन के चुनाव को बहुकोणीय बना दिया है।
घोटाले पर उछलने वाले सवालों के चक्कर में मीडिया से बचते दयानिधि ने जीत की उम्मीद अपने विरोधी मतों के बंटवारे पर टिका दी है। इन सारी उम्मीदों के बावजूद यहां के लोगों को मुकाबला पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों (द्रमुक-अन्नाद्रमुक) में आमने-सामने का ही दिखता है।
चेन्नई सेंट्रल से 20 प्रत्याशी
डीएमके के दयानिधि मारन का मुख्य मुकाबला एआईएडीएमके के एसआर विजयकुमार से है। हालांकि मैदान में डीएमडीके जेके रविंद्रन, कांग्रेस के सीडी मयप्पन, आप के जे प्रभाकरन, बीएसपी के मुरलीकृष्णनन समेत कुल 20 प्रत्याशी हैं।
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के विजेता
चेन्नई सेंट्रल
जीते दयानिधि मारन (डीएमके), दूसरे स्थान पर रहे एसएमकेएम अली (एआईएडीएमके)
चेन्नई नॉर्थ
जीते टीकेएस एलंगोवन (डीएमके), दूसरे स्थान पर रहे डी पांडियन (सीपीआई)
चेन्नई साउथ
जीते सी राजेंद्रन (एआईएडीएमके), दूसरे स्थान पर रहे आरएस भारती (डीएमके)