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आसाराम ने खुद को बताया 'हाथी', आलोचकों को 'कुत्ता'

Tue, 08 Jan 2013 08:18 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 08 Jan 2013 08:18 PM IST
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people criticized asaram statement at social media

गैंगरेप मामले पर अपने बेतुके बयान की तीखी आलोचना के बावजूद संत आसाराम अपने रुख पर कायम हैं। अपने बयान पर खेद जताना तो दूर उलटे उन्होंने इस बयान की निंदा करने वालों को भोंकने वाला कुत्ता करार दे दिया।

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आसाराम ने कहा कि उनके बयान को मीडिया और उनके आलोचकों ने गलत तरीके से पेश किया। आसाराम ने प्रवचन के दौरान बताया, 'मुझसे किसी ने पूछा था कि मेरी पत्नी मुझसे लड़ती है तो मैंने कहा कि ताली एक हाथ से नहीं बजती। उस टिप्पणी पर कुत्तों की तरह लोग भौंक रहे हैं। मैं तो हाथी हूं उन पर टिप्पणी नहीं करूंगा।'
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उन्होंने कहा कि पहले एक कुत्ता भोंकता है। तब दूसरा कुत्ता भोंकता है। इसके बाद आसपास के और भी कुत्ते भोंकने लगते हैं। ऐसे में यदि हाथी कुत्तों के पीछे भागने लगे तो कुत्तों का महत्व बढ़ेगा और हाथी का घटेगा। इसलिए लोगों को जो कहना है, कहते रहें, मुझे परवाह नहीं है। मुझे कुत्तों के पीछे भागने की जरूरत नहीं है।
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आसाराम ने कहा कि मैंने पहले गलत क्या कहा था। एक आदमी मेरे पास यह कहते हुए आया था कि मेरी पत्नी मुझसे लड़ती है। तो मैंने उससे कहा कि ताली एक हाथ से नहीं बजती। लेकिन मेरी इस बात को मीडिया ने दूसरी टिप्पणी से जोड़ दिया।

आसाराम ने सोमवार को कहा था कि दिल्ली गैंगरेप की शिकार युवती भी इस अपराध में बराबर की जिम्मेदार है। युवती को आरोपियों को भाई कहना चाहिए था और उनके सामने गिड़गिड़ाकर छोड़ देने के लिए कहना चाहिए था। आसाराम ने कहा कि पिछले सालों में उन्होंने समाज में ऊंचा दर्जा और सम्मान हासिल किया है। इसके चलते उनके बहुत से आलोचक बन गए हैं।

चेतन भगत
:- आसाराम बापू के लॉजिक के अनुसार, मुंबई में अंडरवर्ल्ड अपराधी नहीं हो सकते हैं। आखिरकार, यहां हर कोई उन्हें भाई कहता है।

सुब्रमण्यम स्वामी
:- कल आसाराम कह सकते हैं कि हिटलर को मारने के लिए चर्चिल को सेना भेजने की बजाय उसके सामने सत्याग्रह और आमरण अनशन करना चाहिए था।

तस्लीमा नसरीन
:- पौराणिक धार्मिक गुरु अपने चेलों का अपनी अज्ञानता और मूखर्ता से ब्रेनवॉश करते रहते हैं।

रवीश कुमार (एनडीटीवी)
:- दरिया ने हमको ये कहकर शर्मिंदा कर दिया, तूफान जितने आए हैं साहिल से आए हैं।

दिबांग
:- अगर वह यह कहते हैं कि ताली एक हाथ से नहीं बजती और पीड़ित छात्रा भी आरोपियों के बराबर की दोषी है तो आसाराम बापू में ना आशा है, ना राम है और ना बापू है।


बरखा दत्त
:- श्रीमान आसाराम आपको बापू कहकर हम महात्मा का अपमान नहीं कर सकते। किसी को आपके लिए प्रार्थना करनी चाहिए कि भगवान आपको पहले दिमाग दे और फिर एक हृदय दे।

शबाना आजमी
:- आसाराम बापू क्या आप हमें कोई जादू का ऐसा मंत्र दे सकते हैं, जो हमें आप जैसे लोगों से बचा सके।

सुमन गंगोपाध्याय
:- मैं आसाराम बापू को नहीं, बल्कि इस समाज को गलत मानता हूं। आसाराम बापू को बनाने में इस समाज की अहम भूमिका है, आसाराम बापू की नहीं।

गब्बर सिंह
:- प्यारे आसाराम बापू, यह 'भैया' वाली ट्रिक ऑटो वालों के साथ काम नहीं करती। भैया जुहू चलोगे? नहीं।

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