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23 हजार रुपए महीने पर पवार ने दे दी 348 एकड़ जमीन

Thu, 18 Oct 2012 09:05 PM IST
मुंबई/अमर उजाला ब्यूरो
मुंबई/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 18 Oct 2012 09:05 PM IST
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Pawar family Surrounded in Scam charges
घोटालों के दौर में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार भी घिर गए हैं। बृहस्पतिवार को एक पूर्व आईपीएस अधिकारी ने पवार और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पवार पर अपने अधिकारों का गलत प्रयोग करते हुए लवासा प्रोजेक्ट के लिए निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया, जबकि इस कंपनी में पवार की बेटी सुप्रिया सुले की भी हिस्सेदारी थी।
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महाराष्ट्र कैडर के पूर्व आईपीएस अफसर और आरटीआई कार्यकर्ता वाईपी सिंह ने कहा कि शरद पवार ने अपने भतीजे अजीत पवार के साथ मिलकर 348 एकड़ जमीन 2002 में निजी कंपनी लेक सिटी कारपोरेशन (अब लवासा कारपोरेशन) को मात्र 23 हजार रुपये महीने की दर पर 30 साल की लीज पर दिला दी। अजीत पवार तब महाराष्ट्र सरकार में सिंचाई मंत्री और महाराष्ट्र कृष्णा वैली डेवलपमेंट कारपोरेशन के चेयरमैन भी थे। यह जमीन इसी कारपोरेशन की है।
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उन्होंने कहा कि जमीन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए आवंटित कर दी गई। सिंह के मुताबिक लवासा कारपोरेशन में शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले और दामाद सदानंद सुले के करीब 21 फीसदी शेयर थे। लेकिन उन्होंने 2006 में अपनी हिस्सेदारी बेच दी।
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सिंह ने कहा कि 2008 में एक्सिस बैंक ने लवासा कारपोरेशन को दस हजार करोड़ रुपये की कंपनी माना था। इस हिसाब से सुप्रिया को शेयरों की बिक्री से करीब 240 करोड़ रुपये मिले होंगे, लेकिन 2009 के चुनाव में दायर हलफनामे में सुप्रिया ने शेयरों की बिक्री से हुई इस आमदनी को छिपाया था। उन्होंने अपनी संपत्ति 15 करोड़ रुपये ही बताई थी।
 
सिंह ने इसे मनी लांड्रिंग का बड़ा घोटाला करार देते हुए सरकार से मांग की कि वह पवार परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर मामले की जांच कराए। उनके अनुसार तत्कालीन राजस्व मंत्री नारायण राणे ने इस जमीन के आवंटन पर सवाल खड़ा किया था कि बिना उनके मंत्रालय की अनुमति के यह जमीन एक निजी कंपनी को दे दी गई।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री के पद पर होते हुए भी शरद पवार ने 14 जुलाई 2007 को लवासा कंपनी के गेस्ट हाउस ‘एकांत’ में अजीत और महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें लवासा प्रोजेक्ट से जुड़े कई फैसले हुए। सिंह ने सवाल उठाया कि शरद पवार महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक बैठक में कैसे शिरकत कर सकते हैं।

क्या लगाए आरोप
शरद पवार और अजीत पवार ने निजी कंपनी को 23 हजार रुपये महीने के किराए पर ही दे दी 348 एकड़ जमीन  
इस कंपनी में शरद पवार की बेटी और दामाद के भी शेयर थे, जो बाद में बेच दिए गए
लेकिन चुनावी हलफनामे में सुप्रिया ने नहीं किया था, शेयर बिक्री से हुई आमदनी का जिक्र

केजरीवाल को भी लपेटा
वाईपी सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल उस जनसमिति में शामिल थे जिसने पुणे के सहयाद्री पहाड़ियों की जमीन की जांच पड़ताल की थी। इस समिति में उनके साथ मैं खुद, एसएम मुशरिफ और निर्मल कुमार सूर्यवंशी शामिल थे। बाद में केजरीवाल ने अकेले लवासा जाकर भी छानबीन की थी। अपनी जांच रिपोर्ट उन्होंने प्रशांत भूषण को ईमेल के जरिए भेजी थी।

केजरीवाल ने भाजपा अध्यक्ष गडक री पर महाराष्ट्र में जमीन घोटाले का आरोप तो लगाया लेकिन शरद पवार के परिवार के घोटाले पर चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा कि अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण केजरीवाल कांग्रेस और भाजपा नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं लेकिन शरद पवार के खिलाफ सबूत होते हुए भी मौन हैं।

केजरीवाल ने कहा
वाईपी सिंह अच्छा काम कर रहे हैं। मैं उनका सम्मान करता हूं। लेकिन अचानक उन्होंने ऐसी बातें क्यों कहीं, मुझे नहीं पता।

1 नवंबर से होगी जंग
वाईपी सिंह ने कहा कि उनकी पत्नी आभा सिंह 1 नवंबर को अपने एनजीओ रणसमर की ओर से इस पूरे घोटाले की आरटीआई द्वारा एकत्र की गई जानकारी एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपेंगी।


पवार की सफाई
इस मामले में कुछ भी गलत नहीं किया गया है। तत्कालीन विलास राव देशमुख सरकार ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए यह भूमि लेक सिटी कंपनी को मुहैया कराई थी। इस क्षेत्र का अस्सी प्रतिशत हिस्सा जलमग्न है। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए मैं इस पर ज्यादा नहीं बोलना चाहता हूं।

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