पटनाः अपनों के लिए दर-दर भटक रहे लोग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शुक्रवार को बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में रावण दहन के बाद हुई भगदड़ के बाद अब पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के इमरजेंसी वॉर्ड के बाहर अफरा-तफरी का माहौल है।
जिनके परिजन या परिचित घायल हुए हैं वे यह पता नहीं कर पा रहे हैं कि उनकी हालत कैसी है। कई लोग अपने रिश्तेदारों को ढूंढ रहे हैं और उनको अंदर जाने की अनुमति नहीं मिल पा रही है।
पटना में वकील अंजुम बारी घटना के वक़्त गांधी मैदान के बाहर थे। वह कहते हैं, "मैं रामगुलाब चौक के बाहर खड़ा था। अचानक लोगों के चीखने की आवाज़ें सुनाई देने लगीं। बाबू बचाओ, मैया गे, बाबू गे ऐसी आवाज आने लगी थी।"
वह कहते हैं, "जब मैं गया तो वहां भगदड़ का माहौल था। लोग भाग रहे थे कई लोगों को हमने उठाया। उनके मुंह पर पानी डाला। मैंने क़रीब 25 लोगों की मदद की। वहां प्रशासन के लोग पर्याप्त नहीं थे और वे उतनी चुस्ती के साथ काम नहीं कर पा रहे थे जिसकी वजह से यह घटना हुई।"
अंजुम बारी कुछ घायलों को लेकर पीएमसीएच आए तो उनके मुताबिक यहां की स्थिति और भयावह थी।
भगदड़ में हुआ लाठीचार्ज
महिला ऑटो चालक पिंकी देवी भी गांधी मैदान के गेट के तरफ से ही निकल रही थीं।
वह कहती हैं, "हमलोग सामने से गेट की तरफ निकल रहे थे। अचानक प्रशासन के आदेश पर गेट बंद कर दिया गया और कहा गया कि उसमें करंट आ गया है। ऐसा सुनते ही पीछे की तरफ सबलोग भागने लगे। लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे इसके बाद प्रशासन की तरफ से लाठीचार्ज भी किया गया। कई लोग पैरों से कुचले गए।"
पिंकी देवी की सास की मौत हो गई है। वह कहती हैं, "पीएमसीएच में हमें किसी से मिलने भी नहीं दिया जा रहा है।"
पीएमसीएच के बाहर मौजूद एक महिला प्रशासन को दोषी ठहराते हुए कहते हैं कि प्रशासन ने लाठीचार्ज किया जिसकी वजह से गांधी मैदान में अफरा-तफरी मच गई।
उन्हें इस बात की भी शिकायत है कि पीएमसीएच में उन्हें उनके रिश्तेदारों से मिलने नहीं दिया जा रहा है और न ही उन्हें यह जानकारी मिल पा रही है कि उनकी हालत कैसी है।