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मुंबई हमलावरों की तुलना में ज्यादा खतरनाक थे पठानकोट के आतंकी

Mon, 04 Jan 2016 09:36 PM IST
Updated Mon, 04 Jan 2016 09:36 PM IST
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Pathankot: Terrorist are more dangerous than mumbai attacker

पठानकोट एयरबेस में आतंकियों के खिलाफ अभियान लंबा खिंचने पर भले ही कुछ सवाल खड़े हो रहे हों लेकिन सरकार इससे इत्तेफाक नहीं रखती। सरकारी सूत्रों का कहना है कि आतंकवादी अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाने के लिए भारी मात्रा में हथियार तथा गोला बारूद लेकर आए थे और बहुत अच्छी तरह से प्रशिक्षित थे।

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इस वजह से ऑपरेशन लंबा चला। इसके अलावा नुकसान से बचने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर परिकर की तरफ से कड़े निर्देश थे कि अनावश्यक जोखिम न लिए जाएं।
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सूत्रों के अनुसार आतंकवादियों की योजना वायु सेना की संपत्ति को अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाने की थी। इस एयरबेस पर मिग 21 लड़ाकू विमान और एमआई 25 हेलीकॉप्टर खड़े होते हैं। आतंकी उन तक पहुंचना चाहते थे।
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अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए उन्हें 2008 के मुंबई हमलावरों की तुलना में अधिक अच्छा प्रशिक्षण दिया गया था। सूत्रों की मानें तो ऑपरेशन का लंबा चलना कोई मुद्दा नहीं है। सेना का मुख्य लक्ष्य नुकसान को कम से कम रखना था। साथ ही सुरक्षा बल कम से कम एक आतंकवादी को जिंदा पकड़ना चाहते थे।

सूत्रों के मुताबिक पठानकोट हमले और फिर अफगानिस्तान में भारतीय वाणिज्य दूतावास को निशाना बनाने के पीछे भारत-पाकिस्तान वार्ता को पटरी से उतारने का मकसद है।

अलर्ट जारी होने से पहले ही एयरबेस में दाखिल हो चुके थे आतंकी

Pathankot: Terrorist are more dangerous than mumbai attacker

पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले मामले में एनआईए की जांच में खुफिया एजेंसियों के साथ-साथ पंजाब पुलिस की बड़ी चूक सामने आने लगी है। पता चला है कि आतंकियों ने खुद को दो और चार के दो गुटों में बांट लिया थ। इसमें से दो आतंकी अलर्ट जारी होने के पहले ही एयरबेस में दाखिल हो चुके थे।

उन्होंने वहीं झाड़ियों में छुपकर शनिवार सुबह तक का इंतजार किया। दूसरी ओर पुलिस अधीक्षक और उनके साथियों को अगवा करने वाला गुट दूसरा था। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस बात की आशंका है कि दो आतंकी बृहस्पतिवार को एसपी सलविंदर सिंह के अपहरण से पहले ही एयरबेस पहुंच गए थे।

एसपी के साथ उनके साथी राजेश वर्मा तथा कुक का भी अपहरण हुआ था। आतंकियों ने वर्मा का गला रेत दिया था। हालांकि उनकी जान बच गई। वर्मा ने अधिकारियों को बताया है कि उन्होंने चार आतंकवादियों की आवाज सुनी थी। वे लोग फोन पर किसी से बात कर रहे थे।

संभवत: वे पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के संपर्क में थे। आतंकियों ने जब अपने आकाओं को बताया कि वे अभी एयरबेस में नहीं घुस पाए हैं तो दूसरी तरफ से उनसे सवाल पूछा गया। वर्मा के अनुसार दूसरी तरफ से कहा गया कि तुम लोग पीछे क्यों रह गए।

तुम्हारे साथी पहले ही एयरबेस में पहुंच गए हैं। इस पर आतंकियों ने बताया कि वे रास्ते में हैं। कई जगह पुलिस पिकेट होने के कारण वे लक्ष्य तक नहीं पहुंच सके।

एयरबेस में दो गुटों में घुसे थे आतंकी

Pathankot: Terrorist are more dangerous than mumbai attacker

वर्मा से मिली इस जानकारी से ही जांच अधिकारियों को अनुमान है कि दो आतंकी काफी पहले एयरबेस में दाखिल हो चुके थे। यह भी आशंका है कि बाकी के चार आतंकवादी एक तारीख की सुबह तक वहां पहुंचे हों, जबकि अलर्ट इसी दिन दोपहर में जारी किया गया था।

मामले में तीन एफआईआर दर्ज

दरअसल इस पूरे मामले में एसपी के बयान की तस्दीक करने में ही महत्वपूर्ण समय बीत गया। सूत्रों के अनुसार एसपी की बात को पहले गंभीरता से नहीं लिया गया। वह भी तब, जब एसपी के कुक की हत्या कर दी गई थी और आतंकी लगातार उनके ही फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। इस गलती की वजह से आतंकियों को काफी समय मिल गया।

एनआईए ने एसपी का अपहरण करने, उनके कुक की हत्या और एयरफोर्स बेस पर हमला करने के मामले में तीन एफआईआर दर्ज की हैं। ऑपरेशन खत्म होने के बाद जांच में तेजी आएगी।

सूत्रों के अनुसार एजेंसी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकियों ने एयरबेस में घुसने के लिए पीछे की दीवार का सहारा लिया। जांच एजेंसी जल्द ही सरकार को विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी।

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