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लोकसभा टिकट को लेकर कांग्रेस-भाजपा में बगावत

Thu, 06 Mar 2014 11:33 PM IST
Updated Thu, 06 Mar 2014 11:33 PM IST
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party leaders get angry because of not getting tickets

लोकसभा चुनाव के फाइनल में सियासी दल एक दूसरे के खिलाफ तो बाद में लड़ेंगे मगर उससे पहले पार्टियों में नेताओं के बीच ही टिकट को लेकर आपस में जंग छिड़ गई है। क्या राहुल की प्रतिष्ठा और क्या नरेंद्र मोदी का कद।

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भाजपा और कांग्रेस के दिग्गजों को टिकट के आगे किसी चीज की परवाह नहीं है। सपा और बसपा उत्तर प्रदेश में सभी टिकट बांट चुके हैं। फिर भी अंदरूनी गुटबाजी के चलते आखिरी वक्त तक टिकट कटने का डर उनके उम्मीदवारों को सता रहा है।
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सियासत का ग्राफ नीचे आने के बाद कांग्रेस में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ में टिकट को लेकर मौजूदा सांसदों में ही भगदड़ मची हुई है।
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नतीजतन, उम्मीदवारों की पहली सूची को फाइनल करने में हाईकमान के पसीने छूट गए हैं।

सभी दलों में मचा घमासान

party leaders get angry because of not getting tickets

तो भाजपा में 70 से ज्यादा उम्र वाले को टिकट नहीं देने के मानदंड के चलते लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और विजय कुमार मल्होत्रा जैसे दिग्गज झुंझलाए बैठे हैं। टिकट का घमासान अन्य दलों में भी चल रहा है।

लालू यादव के कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले रामकृपाल यादव ने राजद से ही बगावत का बिगुल बजा दिया है। वजह यह है कि पाटलिपुत्र से लालू ने उनकी अनदेखी कर अपनी बेटी मीसा को लोकसभा उम्मीदवार बना दिया है।

राहुल के फॉर्मूले से बढ़ी रार

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कांग्रेस में आंतरिक चुनाव के जरिए उम्मीदवार तय करने के राहुल गांधी के फार्मूले से पार्टी का घमासान सबके सामने आ गया है। राहुल पर ही सवाल उठाते हुए केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में टिकटों की नीलामी की जा रही है।

मध्य प्रदेश के मंदसौर के आंतरिक चुनाव में तो वहां की सांसद और राहुल की करीबी नेता मीनाक्षी नटराजन पर ही फर्जी लोगों को कांग्रेस का सदस्य बनाकर वोट डलवाने का आरोप लगा है।

दिल्ली में दागी जगदीश टाइटलर ने मौजूदा सांसद जयप्रकाश अग्रवाल को ही आंतरिक चुनाव में चुनौती दे दी।

सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद टाइटलर ने नामांकन वापस लिया। उत्तर प्रदेश में जगदंबिका पाल, वीनू पांडे, हषवर्धन के पार्टी छोड़ने की अटकलें है।

तो आंध्र प्रदेश से डी पुरंदेश्वरी कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने को तैयार हैं। टिकट की सूची फाइनल होते-होते दो दर्जन से ज्यादा सांसदों के दूसरी पार्टी में जाने की चर्चा है।

भाजपा में भी कम घमासान नहीं

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भाजपा में 70 से ज्यादा उम्र के नेताओं को टिक नहीं देने के फार्मूले को लेकर बड़े नेताओं के बीच जबरदस्त घमासान मच गया है। आडवाणी तक को कहना पड़ा रहा है कि वह गांधीनगर से चुनाव लड़ना चाहते हैं और मुरली मनोहर जोशी को भी बनारस से कहकर टिकट मांगनी पड़ रही है।

इनके चक्कर में मंदसौर से डॉ लक्ष्मी नारायण पांडे, कलराज मिश्र, लालजी टंडन जैसे बुजुर्ग दिग्गजों का टिकट भी खतरे में पड़ गया है। बिहार में भाजपा को खड़ा करने वाले जूनियर मोदी यानी सुशील मोदी खेमे को प्रदेश के दिग्गजों के विरोध से रूबरू होना पड़ रहा है।

सबको चाह‌िए ट‌िकट

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उनसे गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे, सीपी ठाकुर मुंह फुलाए बैठे हैं। दिल्ली में भी भाजपा में एक अनार सौ बीमार की स्थिति है। यहां बुजुर्ग विजय मल्होत्रा भी टिकट चाहते हैं। यहां पार्टी के पास बड़े चेहरों की किल्लत है।

टिकट के चक्कर में ही वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला ने छत्तीसगढ़ में भाजपा को ही अलविदा कह दिया।

उत्तर प्रदेश में वरुण गांधी, मेनका गांधी समेत आधे से ज्यादा सिटिंग सांसद सीट बदलना चाहते हैं। बाहर से आए नए चेहरे जैसे बागपत से संभावित उम्मीदवार सत्यपाल सिंह को लेकर भाजपा में अंतर्कलह सामने आ रही है।

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