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वाजपेयी की राह में नेताओं से बड़ा संकट पार्टी संविधान

Thu, 13 Dec 2012 10:15 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ Updated Thu, 13 Dec 2012 10:15 AM IST
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party constitution being problem for up bjp president

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की नई कमेटी की राह में पार्टी नेताओं से बड़ा संकट संविधान बन गया है। वह संविधान की मानते हैं तो लोगों को समायोजित करने के अवसर कम होते हैं। संविधान की अनदेखी करते हैं तो चहुंतरफा संकट खड़ा है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने यह ऐलान किया था कि उनकी अध्यक्षी के कार्यकाल में दल पुरानी राह पर नहीं चलेगा। मनोनयन से संगठन का ढांचा खड़ा करने की परंपरा बंद होगी। संगठन का काम पार्टी संविधान के अनुसार ही चलेगा। यह बात अब खुद उन्हीं के लिए कसौटी है।

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27 के विपरीत बने थे 37 पदाधिकारी
संविधान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश श्रेणी तीन में आता है। श्रेणी तीन के प्रदेश वह हैं जहां लोकसभा की 21 से अधिक सीटें होती हैं। इस लिहाज से उत्तर प्रदेश में भाजपा की प्रदेश कमेटी में पदाधिकारियों की संख्या अध्यक्ष को मिलाकर अधिकतम 27 हो सकती है। इनमें 10 उपाध्यक्ष, चार महामंत्री, एक महामंत्री संगठन, 10 मंत्री और एक कोषाध्यक्ष का पद निर्धारित किया गया है। पदाधिकारी मिलाकर प्रदेश कार्यसमिति में अधिकतम 105 सदस्य रखे जा सकते हैं।
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पर, पिछली टीम में 10 उपाध्यक्ष, 10 मंत्रियों की जगह 18 मंत्री और पांच महामंत्रियों के स्थान पर सात महामंत्री बने थे। इसके अलावा 109 कार्यसमिति के सदस्य, 195 विशेष आमंत्रित सदस्य बनाए गए थे। अन्य श्रेणी के सदस्य अलग थे।
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नेतृत्व ने जताई थी नाराजगी
पार्टी संविधान की अनदेखी पर केंद्रीय नेतृत्व ने नाराजगी जताई थी। पर, बाद में यह घोषणा करके कि यह फैसला नजीर नहीं बनेगा, मामले को तूल नहीं दिया था। कारण, विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नेतृत्व अकारण लोगों को नाराज नहीं करना चाहता था। इसलिए मनमानी संख्या में पदाधिकारी बनाने की छूट मिलना मुश्किल है।

पर टीम बनाने में क्या करेंगे
लगभग 12 वर्षों बाद संगठनात्मक चुनाव कराकर और खुद निर्वाचित अध्यक्ष बनकर वाजपेयी ने मनोनयन युग की समाप्ति की पहली चुनौती से तो पार पा लिया। पर, दूसरी चुनौती ज्यादा कठिन दिख रही है। पुरानी टीम जितनी बड़ी है अगर उसमें से वह पार्टी संविधान के मुताबिक भी समायोजन करें तो सबका टीम में आना संभव नहीं है।


संविधान की कसौटी पर खरा उतरने के लिए लंबी काटछांट करनी पड़ेगी। इससे भी तमाम लोगों के नाराज होने का संकट है। फिर वाजपेयी वह चाहेंगे कि नई टीम उनके मुताबिक गठित हो। नई टीम में वह रहें जो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें। इसके लिए वह कुछ नए चेहरे टीम में रखना चाहेंगे। यह सब बहुत सरल नहीं है।

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