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दिल्ली रैलीः पढ़िए, मोदी की सुनाईं 4 दिलचस्प कहानियां

Mon, 30 Sep 2013 12:07 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 30 Sep 2013 12:07 PM IST
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parts of modi speech in delhi rally

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को दिल्ली की अपनी रैली में भाषण के बीच-बीच में कहानियां सुनाते भी नजर आए। इस पर रैली में शामिल लोगों ने जमकर ठहाके लगाए।

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मोदी की पहली कहानीः शराब नहीं, न्यूज पेपर पढ़ना ही बंद किया
हाथ में न्यूज पेपर लिए एक शराबी सुबह-सुबह दारू पी रहा था। उसमें एक आर्टिकल शराब से होने वाले नुकसानों पर था। पत्नी ने देखा और समझाने लगी कि पढ़ो इसे। इस लत को छोड़ दो। दूसरे दिन, शराबी के हाथ में शराब थी, लेकिन न्यूज पेपर गायब था। पत्नी के सवाल करने पर शराबी ने जवाब दिया ‘तुमने ने तो कहा था कि इसे छोड़ दो और मैंने छोड़ दिया’। कुछ इसी तरह भ्रष्टाचार में डूबी देश की सरकार काम कर रही है। इस पर रोक लगाने का उपाय खोजने की जगह काम ही करना बंद दिया है।
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मोदी की दूसरी कहानीः नियम तोड़ने का सवाल नहीं
मैं छोटा था। गुजरात से दिल्ली आ रहा था। ट्रेन में बर्थ नहीं मिली। एक जानकार ने टीटी से कहा, भाई, समाजसेवी हैं, एक बर्थ दे देना, लेकिन रात 11 बज गए, सीट नहीं मिली। मैंने टीटी से सीट देने की गुजारिश की। उसने कहा कि माउंट आबू में मिल जाएगी। मैंने कहा, वहां तो स्टाफ बदला जाएगा। इस पर टीटी का जवाब था, मेरा नियम है कि मैं बगैर घूस लिए सीट नहीं देता। फिर अपना नियम तोड़कर आपको कैसे सीट दे दूं।
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मोदी की तीसरी कहानीःरेल के डिब्बे में चाय बेची

बचपन में मैंने रेल के डिब्बों में चाय बेची है। यह भाजपा जैसी पार्टी की विरासत है जो मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है। मैं न कभी शासक था, न हूं और होने की कोई मंशा है। मैं सेवक था, सेवक हूं और रहूंगा भी। मेरे डूबते हुए कल को तराशिए मेरे काम पर भरोसा कीजिए, कभी आपका भरोसा टूटने नहीं दूंगा।


मोदी की चौथी कहानीः
नई तरह की गांधी भक्ति

केंद्र सरकार गांधी भक्ति में डूबी है। इसका मतलब है कि गांधी छाप नोटों को टन में उठाकर ले जाना। उसका ढेर लगाना। शून्य कम पड़ रहे हैं, हिसाब टनों में हो रहा है। यह एक नई गांधी भक्ति है।


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