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भाजपा नहीं, अब विहिप उछालेगी राममंदिर का मुद्दा

Sat, 06 Jul 2013 09:00 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 06 Jul 2013 09:00 PM IST
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Parties react sharply to BJP raking up Ram temple issue

अयोध्या में राम मंदिर बनाने के भाजपा महासचिव अमित शाह के बयान पर पार्टी ने कूटनीतिक सियासी दांव खेला है।

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शाह ने यह मुद्दा उछाल कर सियासी माहौल गरमा दिया है, लेकिन लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा ने राम मंदिर के मुद्दे को खुद हवा देने की बजाए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के हवाले कर दिया है।

आने वाले दिनों में एक ओर विहिप राम मंदिर के मुद्दे को गरमाती मिलेगी, जबकि भाजपा लगातार यही दोहराएगी कि वह शुरू से ही मंदिर का निर्माण चाहती है।

साथ ही पार्टी कहेगी कि वह विवाद को अदालत अथवा बातचीत के जरिये आम सहमति से सुलझाने के पक्ष में है।

भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा भी है कि राम मंदिर शुरू से भाजपा के एजेंडा में रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी मंदिर निर्माण करने की बजाए उसके निर्माण की राह की बाधा दूर करने में मदद करेगी।
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नकवी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि भाजपा को चुनाव में ही राम मंदिर की याद आती है तो कांग्रेस को रावण की याद हमेशा क्यों आती है।

बहरहाल, नरेंद्र मोदी के करीबी व भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी अमति शाह के अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने और मंदिर निर्माण संबंधी बयान देने को मंदिर मुद्दे को हवा देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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वैसे पार्टी खुद इस मुद्दे को ज्यादा नहीं उछालेगी, क्योंकि उसे भय है कि  इससे लोग कांग्रेस के आरोप पर यकीन करने लगेंगे कि चुनाव के समय ही भाजपा को राम मंदिर की याद आती है। इसलिए भाजपा ने यह मुद्दा विहिप व साधु-संत के हवाले छोड़ दिया है।

विहिप भी नहीं चाहती है कि भाजपा खुद फिर से इस आंदोलन में कूदे। विहिप 90 के दशक में लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के भी पक्ष में नहीं थी। विहिप का मानना था कि भाजपा ने उसका मुद्दा हड़प लिया है।


विहिप सिर्फ इतना चाहती है कि भाजपा हमेशा राम मंदिर के पक्ष में खड़ी दिखाई दे। यह भी माना जा रहा है कि विहिप को खुश करने के मकसद से भी शाह ने राम मंदिर का मुद्दा उछाला है।

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