यूपी की सियासत में 'भूचाल' लाने की चल रही है तैयारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य न बढ़ाकर व भुगतान के तरीकों में बदलाव कर किसानों को मायूसी दी है। अब यही गन्ना उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘भूचाल’ लाएगा। सियासी पार्टियां केन प्राइज को मुद्दा बनाकर किसानों के दिलों में जगह बनाने को बड़ा आंदोलन प्लान कर रही हैं। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी गन्ने पर गदर मचना तय माना जा रहा है। भाजपा, कांग्रेस और बसपा इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। वहीं मंडल और जिला मुख्यालयों पर भी धरने प्रदर्शन होंगे।
किसान गन्ना ही नहीं उगाते बल्कि बारूदी तेवर भी अख्तियार करते हैं। ऐसे में चालीस लाख किसानों के हितों की अनदेखी सरकार को भारी पड़ सकती है। इस बार किसानों को उम्मीद थी कि सरकार गन्ने का रेट कम से कम 350 रुपये प्रति कुंतल घोषित करेगी मगर सरकार ने रेट न बढ़ाकर किसानों की नाराजगी मोल ले ली है। पिछले सत्र का प्रदेश की चीनी मिलों पर 257368.08 लाख रुपये बकाया है। इसे दिलाने के बजाए नए सत्र के भुगतान में भी सरकार ने किस्तें बांध दी हैं। 240 रुपये गन्ना गिराने के बाद और शेष सत्र समाप्ति के तीन महीने बाद तक।
भुगतान का यह गणित मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर, संभल, रामपुर, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गाजियाबाद, बरेली, गोरखपुर, कुशीनगर और देवरिया समेत सभी गन्ना उत्पादक इलाकों के किसानों में नाराजगी भर रहा है। अब सियासी पार्टियों ने इसी नाराजगी को कैश करने का प्लान बना लिया है। आगामी विधानसभा सत्र में भी पार्टियां गन्ने के मुद्दे को जोरशोर से उठाने की तैयारी कर रही हैं।
पंद्रह को प्रदेश भर में चक्का जाम: नरेश टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा है कि किसानों के साथ बड़ा धोखा हुआ है। सरकार ने जो मूल्य तय किया है उसमें फसल की लागत भी नहीं निकलेगी। लिहाजा 15 नवंबर को किसान प्रदेश भर में चक्का जाम करेंगे। जगह जगह जाम लगेगा। हाईवे पर ट्रैफिक रोका जाएगा। तहसीलवार प्रदर्शन किए जाएंगे।
किसान के साथ सबसे बड़ा धोखा: बीएम सिंह
मुरादाबाद। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष बीएम सिंह का कहना है कि किसानों के साथ इससे बड़ा धोखा कोई हो ही नहीं सकता। किसानों को चाहिए कि वह इस वक्त संगठित होकर अपना विरोध दर्ज कराएं। सरकार को बता दें कि वह फसल ही नहीं उगाते सरकार बनाते और बिगाड़ते भी हैं। 280 का रेट तय किया है और उसमें भी किस्तें बांधी गईं हैं।
कोल्हू और क्रेशर रेट बढ़ाने की तैयारी में
मुरादाबाद। कोल्हू पर अभी तक 150 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से गन्ना खरीदा जा रहा था। क्योंकि अब सरकार ने गन्ने का रेट घोषित कर दिया है लिहाजा अब कोल्हू को भी रेट बढ़ाने पड़ेंगे। क्योंकि अगर रेट नहीं बढ़ाएंगे तो कोल्हू को गन्ना मिलना मुश्किल हो जाएगा।
सोना आसमान पर, गन्ने का भाव गर्त में
सूबे में किसानों की दुर्दशा से हर कोई वाकिफ है और इसका कारण हैं गन्ने के दाम। अगर 37 साल पहले की तस्वीर उठाकर देखी जाए, तो तब के मुकाबले आज सोने के भाव तो आसमान छू गए, मगर गन्ना गर्त में है। जहां वर्ष 1967 में 12 क्विंटल गन्ने में एक तोला सोना आ जाता था, वहीं आज एक तोला सोना खरीदने के लिए किसान को 92.85 क्विंटल गन्ना बेचना पड़ता है। सोने और गन्ने के दामों में इस अंतर से किसान के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कृषि प्रधान प्रदेश में अन्नदाताओं को फसलों के वाजिब दाम न मिलने से समाज में असमानता का दायरा बढ़ता जा रहा है। किसानों का जीवन संघर्ष में गुजर रहा है। साल-दर-साल काश्तकारों का हाल बेहाल हो रहा है। वर्ष 1967 से आज की तुलना की जाए, तो सोने के दाम आसमान छू गए, लेकिन गन्ना गर्त में जा रहा है। इन 37 सालों में वस्तुओं के दामों पर गौर फरमाया जाए, तो सीमेंट, डीजल, यूरिया, एनपीके समेत खाद्य पदार्थों के दाम कई गुना बढ़कर बुलंदियों पर पहुंच गए हैं। इन हालातों में किसान किस प्रकार जीवन बसर कर रहा है, यह हर कोई जानता है।
99 गुना बढ़ा शिक्षक का वेतन
सामान ही नहीं, शिक्षक के वेतन में भी बढ़ोत्तरी हुई है, जो 99 फीसद है। जहां वर्ष 1967 में एक शिक्षक का वेतन 170 रुपये था, वहीं आज शिक्षक की सैलरी 25000 रुपये है।