पेरिस हमला: बेहद खौफनाक मंजर उभरने के संकेत
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पेरिस में आईएसआईएस का आतंकी हमला बड़े खौफनाक मंजर का संकेत है। आतंकवाद की यह पौध थमने का नाम नहीं ले रही है। लगातार फैलती जा रही है। जबकि अफगानिस्तान ने इसे 1980-81, भारत ने 90-91 से कश्मीर में, अमेरिका ने ट्विन टावर पर हुए हमले के बाद से इसे देखा है। पहले यह क्षेत्रीय स्वरूप में था। कार्रवाई से दबाया जा सकता था और अब आतंकवाद के आकाओं के पास पूरी रियासत है।
अफगानिस्तान में तालिबान के बाद इराक और सीरिया में सक्रिय आईएसआईएस सीधा उदाहरण है। खास बात यह भी है कि दुनिया भर के ऐसे सभी आतंकी संगठनों की मूल अवधारणा एक ही है। इनमें आईएसआईएस काफी धनी संगठन है। इसके पास एजेंडा, पोपैगैंड़ा दोनों है और 80 देशों के युवा और लोगों के इससे जुड़ने की जानकारी आ रही है। आशय यह कि न तो साधन की कमी है और न ही संसाधन की। ऊपर से पश्चिमी देशों को इसने अपनी चपेट में ले लिया है। अभी इसके और भयानक रूप लेने के पूरे आसार हैं।
पेरिस हमले का फ्रांस पर काफी बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है। वहां अब आतंकवाद के प्रभावी रूप लेने से इनकार नहीं किया जा सकता। देखना होगा कि अब फ्रांस अपने देश में लोगों की स्वतंत्रता और स्वच्छंदता में आगे कैसे तालमेल बनाता है। इसमें यूरोपीय यूनियन साथ आता है या फ्रांस अलग लड़ाई लड़ता है। यूरोप की क्या स्थिति रहती है। अमेरिका फ्रांस का कितना साथ देता है और आतंकवाद से लड़ने के नाम पर कौन सी रणनीति बनती है।
भारत में भी दस्तक दे चुका है आईएस
यह भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या आतंकवाद से निबटा जाएगा या इसको लेकर आतंकवादियों के एक वर्ग को समर्थन और दूसरे को निबटाने जैसी दोहरी रणनीति जारी रहेगी। लेकिन इतना तय है कि इस हमले के असर से विश्व अछूता नहीं रहेगा। जहां तक भारत का प्रश्न है, कहा तो जाता है कि आईएसआईएस पाकिस्तान और बांग्लादेश तक दस्तक दे चुका है। भारत में इसके आने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हमारे देश के कुछ युवा इससे प्रभावित हो रहे हैं। इसका कुछ असर भी आ रहा है लेकिन भारत सरकार इसे लेकर काफी संजीदा और सतर्क है। वैसे देश में अल कायदा को लेकर भी काफी कुछ कहा गया, लेकिन अच्छी बात यह है कि किसी के भी इस संगठन के ज्वाइन करने की खबर नहीं आई। फिर भी रणनीति और तैयारी के स्तर पर काफी कुछ हो रहा है। खतरे का अंदाजा लगाकर ऑफ स्क्रीन पर सरकार लगातार सक्रिय है और जो भी किया जाना चाहिए कर रही है।
(शशिधर पाठक से बातचीत पर आधारित)