सीमा पर भारत की दुखती नस छेड़ रहा पाकिस्तान
पाकिस्तानी रेंजर्स ने अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर बसे घनी आबादी वाले गांवों को निशाना बना कर भारत की कमजोर नस को एक बार फिर छेड़ दिया है। बीएसएफ की मुसीबत यह है कि आईबी पर इस तरफ घनी आबादी वाले सैकड़ों गांव हैं जबकि पाकिस्तान की तरफ बहुत कम गांव हैं।
उस पर भारत युद्ध नियमों का पालन करते हुए नागरिकों पर सीधी कार्रवाई नहीं करता। हालांकि अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो बीएसएफ अपनी आक्रामकता का स्तर और बढ़ाएगा।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आईबी, रॉ प्रमुख और उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्होंने बीएसएफ को उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया है। गांव वालों की परेशानी और पलायन को देखते हुए बीएसएफ ने विरोध पत्र दर्ज कराने और प्लैग मीटिंग की पेशकश की, जिसे पाकिस्तान कोई तवज्जो नहीं दे रहा।
पाकिस्तान को जवाब देने का कोई दूसरा रास्ता नहीं
बीएसएफ के महानिदेशक डीके पाठक ने मंगलवार को कहा कि उनके पास पाकिस्तान को गोली से जवाब देने के अलावा और दूसरा रास्ता नहीं है। सूत्र ने बताया कि आईबी पर लगे कंटीले तार (फेंसिंग) और असल सीमा के बीच गांव वालों की जमीनें हैं, जहां वह खेती के लिए जाते हैं जबकि पाकिस्तान की तरफ ना तो तार हैं और ना ही बाशिंदे।
यह बीएसएफ के लिए कमजोर कड़ी साबित हो रहा है। अगर पलायन से इलाका खाली हो जाता है, तो बीएसएफ अपनी कार्रवाई को और सख्त करेगा। बीएसएफ के मुताबिक फोर्स को गांव वालों से पूरी सहानुभूति है, लेकिन शैतानी पर उतारू पाकिस्तान की इन करतूतों का जवाब देना भी जरूरी है।
बीएसएफ सूत्रों ने बताया कि जिन इलाकों में पाकिस्तान फायरिंग कर रहा है, वहां से घुसपैठ भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में पाकिस्तान की इस हरकत का कोई तर्क समझ में नहीं आ रहा है।