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'पाक में हजारों बीघा जमीन छोड़ी, दिल्ली भाया'

Thu, 26 Nov 2015 06:44 AM IST
Updated Thu, 26 Nov 2015 06:44 AM IST
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Pakistani Hindu refugee family came for treatment Aligarh.

दिल्ली में रह रहे पाकिस्तानी शरणार्थियों में से एक ज्ञानचंद का परिवार इलाज के लिए अलीगढ़ आया तो उसने बताया कि वह मर जाएगा लेकिन पाकिस्तान कभी नहीं जाएगा। यहां पर भले ही कुछ तकलीफों में रह रहे हैं लेकिन फिर भी सकून है। ऐसे में अगर समाज और सरकार जरा सा सहारा दे दें तो जिंदगी संवर जाए।

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दिल्ली में मंजनू के टीले पर रह रहे ज्ञानचंद ने बताया कि दिल्ली के कैंप में शरण लेने वाले पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को वहां बेहद गंदे पानी से नहाने को मजबूर होना पड़़ रहा है। बिजली है नहीं और जेनरेटर से सिर्फ चार घंटे बिजली मिलती है वह भी सिर्फ लाइट के लिए। उससे पंखा नहीं चला सकते हैं।
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पाकिस्तान के सिंध हैदराबाद में (दरिया के किनारे) 2000 बीघा जमीन के मालिक रहे ज्ञानचंद को वहां की कुछ जमीन औने पौने दाम में और कुछ यूं ही छोड़कर तीन साल पहले पत्नी मीरा के इलाज के लिए भारत आना पड़ा था। तब से वह और उस जैसे अनेक परिवार यहां रह रहे हैं।

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बताई दर्द भरी दास्तान

Pakistani Hindu refugee family came for treatment Aligarh.

अलीगढ़ में पत्नी मीरा के अलावा बेटे रामा का भी इलाज चल रहा है। यहां उसको इलाज में फायदा और वह सामान्य रूप से चल सके इसके लिए विशेष जूते बनवाए गए हैं।

इन लोगों का अलीगढ़ में इलाज और मदद कर रहे धर्म जागरण समिति के सत्य प्रकाश नवमान कहते हैं कि यह दुर्भाग्य का विषय है कि भारत में भी इन लोगों की मदद के लिए लोगों के हाथ नहीं बढ़ रहे हैं।

मैंने अपने स्तर से इनकी मदद के लिए मुहिम छेड़ी तो मुझसे कहा गया कि धंधा कर रहे हो। लेकिन अब कुछ मदद के साथ ही इनको कुछ राहत मिली है। इनके बच्चे पढ़ रहे हैं और महिलाओं को सिलाई मशीन दी गई है।

'दिन में अंतिम संस्कार नहीं'

Pakistani Hindu refugee family came for treatment Aligarh.

ज्ञानचंद ने बताया कि अगर वहां हिंदू परिवार में किसी की मौत हो जाए तो शव को जलाने और अंतिम संस्कार के लिए रात का इंतजार करना पड़ता है। रात में भी राम नाम सत्य है आदि धार्मिक क्रियाओं उच्चारण नहीं कर सकते हैं। कानूनन इस बात की कोई मनाही नहीं है लेकिन माहौल ऐसा है कि ऐसा कर नहीं  सकते।

भारत जीतता है तो गुस्सा निकालते हैं
भारत पाकिस्तान के मैच में अगर भारत जीत जाए तो कुछ कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लोगों को वहां अल्पसंख्यकों पर जुल्म ढहाने का मौका मिल जाता है। ऐसे संगठनों के लोग यह दलील देते हैं कि तुम पाकिस्तान की हार पर जश्न मना रहे थे। उस रात परिवार की महिलाओं को खेतों या अन्य सुरक्षित ठिकानों पर छिपाना पड़ जाता है।

हिंदू हितों की पुकार करने वाले भी हैं खामोश
धर्म जागरण समिति के सत्य प्रकाश नवमान कहते हैं कि पाकिस्तान में जो हुआ सो हुआ। यहां भारत में भी इन लोगों की मदद के लिए सरकार और समाज आगे नहीं आ रहा है। वह संगठन भी इस मुद्दे पर आगे नहीं आ रहे हैं जो हिंदू हितों की बात करते हैं और दावा करते हैं।

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