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पाक में भाजपा नेताओं के बयानों की गूंज

Sun, 21 Sep 2014 06:21 PM IST
Updated Sun, 21 Sep 2014 06:21 PM IST
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pakistan urdu media review

पाकिस्तान के उर्दू मीडिया में जहां कई भाजपा नेताओं के बयानों की गूंज सुनी जा सकती है, वहीं बाढ़, इमरान खान और ताहिरुल कादरी बराबर सुर्ख़ियों में हैं। कई भाजपा नेताओं के हालिया विवादास्पद बयानों पर रोज़नामा इंसाफ़ का संपादकीय है- सेक्युलर भारत का घिनौना चेहरा।

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अखबार कहता है कि मोदी की सरकार बनने के बाद से कट्टरपंथी हिंदू नेताओं और उनके सेक्युलरिज्म का असल चेहरा सामने आ रहा है।

अख़बार कहता है कि एक तरफ़ मदरसों को 'आतंकवाद की शिक्षा' से जोड़ा जा रहा है तो दूसरी तरफ़ एक केंद्रीय मंत्री ये कहने में जरा नहीं हिंचकीं कि भारत में जानवरों के मांस के व्यापार में जो मुनाफ़ा होता है उससे 'आतंकवादियों की मदद' की जाती है।

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'जोश नहीं होश दिखाओ'

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जंग ने नवाज़ शरीफ़ सरकार के लिए ख़िलाफ़ धरने पर बैठे ताहिरुल क़ादरी की ताज़ा अपील पर संपादकीय लिखा है। इसमें कादरी ने अपने सर्मर्थकों से करंसी नोटों पर 'गो नवाज़ गो' के नारे लिखने को कहा है।

ऐसे नोट लेने से जहां बैंकों का इनकार संपादकीय का हिस्सा है, वहीं क़ादरी को भी मशविरा दिया गया है कि जोश से नहीं होश से काम लें क्योंकि करंसी नोट किसी पार्टी के नहीं देश के होते हैं, इसलिए उन्हें ख़राब न किया जाए।

वहीं एक्सप्रेस लिखता है कि इमरान ख़ान और ताहिरुल क़ादरी के धरनों से अब जनता को मायूसी के सिवा कुछ नहीं मिल रहा है, इसीलिए बेहतर होगा कि इन्हें जल्द से जल्द ख़त्म किया जाए।

इस पर औसाफ़ का कार्टून है जिसमें दोनों नेता हाथ उठाए विजयी मुद्रा में कह रहे हैं – धरने मुबारक चीनी राष्ट्रपति पाकिस्तान छोड़ कर भारत पहुंच गए। वहीं उम्मत ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे पर सुर्ख़ी लगाई – चीनी राष्ट्रपति के दौरे में सीमा विवाद हावी।

अखबार ने भारतीय मीडिया के हवाले से लिखा है कि मोदी चीनी राष्ट्रपति के दौरे से वैसे नतीजे नहीं हासिल नहीं कर पाए जैसी उन्हें उम्मीद थी। उधर, औसाफ़ ने ही अपने संपादकीय में पाकिस्तान सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाया है कि वो बाढ़ पीड़ितों के लिए विदेशों ने मदद नहीं लेगी।

अखबार कहता है कि अब जब सैलाब पंजाब को रौंदता हुआ सिंध तक जा पहुंचा है तो फिर विदेशों से मदद लेने और मदद की अपील करने में क्या हर्ज है।

देशभक्ति का सर्टिफ़िकेट

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रुख़ भारत का करें तो हिंदोस्तान एक्सप्रेस का संपादकीय देशभक्ति का सर्टिफिकेट। अख़बार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान को दुरुस्त करार दिया है कि मुसलमान देश के लिए जिएगा देश के लिए मरेगा।

लेकिन अख़बार ने ये सवाल भी उठाया है कि देश में जिस तरह सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश हो रही है उस पर प्रधानमंत्री की चुप्पी कब टूटेगी। वहीं हमारा समाज ने चीनी राष्ट्रपति के भारत दौरे पर अपने संपादीय में सीमा विवाद और तिब्बत मुद्दे जैसी अड़चनों का ज़िक्र किया है।

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