फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   pakistan hindu marriage registration bill

हिंदू मैरिज बिल को मंजूरी पर पाक मीडिया खुश

Sun, 14 Feb 2016 03:21 PM IST
Updated Sun, 14 Feb 2016 03:21 PM IST
विज्ञापन
pakistan hindu marriage registration bill

पाकिस्तान में हिंदू मैरिज रजिस्ट्रेशन बिल को संसदीय समिति की मंजूरी मिलने का पाकिस्तानी उर्दू मीडिया ने स्वागत किया है। "जंग" ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय को उसके अधिकार देने की दिशा में एक अहम कदम बताया है।

विज्ञापन


अखबार लिखता है कि अब तक पाकिस्तान में ऐसा कोई कानून नहीं था और इसलिए हिंदू शादियों को कोई कानूनी मान्यता नहीं थी। ऐसे में, न सिर्फ हिंदू लड़कियों से जबरन शादी के मामले देखने को मिलते रहे हैं, बल्कि हिंदू समुदाय के लिए पहचान पत्र, वीजा-पासपोर्ट हासिल करने और प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने में बेहद दिक्कतें आती हैं। संसदीय समिति के फैसले का स्वागत करते हुए "जंग" लिखता है कि अब हर हिंदू शादी को रजिस्टर कराना जरूरी होगा।
विज्ञापन


वहीं 'नवा-ए-वक्त' ने बिल का ब्यौरा देते हुए लिखा है कि हिंदू लड़के या लड़की के लिए शादी की उम्र 18 साल होगी और पंडित शादी कराएगा, इस मौके पर सरकारी रजिस्ट्रार भी मौजूद होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

हिंदू मैरिज बिलः किस अखबार ने क्या लिखा

pakistan hindu marriage registration bill

अखबार कहता है कि शादी की उम्र 18 साल होने से बाल विवाह रोका जा सकेगा और पति-पत्नी में से किसी ने भी धर्म बदला तो शादी टूट जाएगी।

अखबार कहता है कि जबरन धर्मपरिवर्तन को लेकर हिंदू बिरादरी की जो आशंकाएं हैं, उनको दूर करने के लिए संसद में बिल मंजूर करने से पहले अगर हिंदू सांसदों से भी राय लेकर कोई सकारात्मक कदम उठाया जाए तो इससे उनके शक और संदेह दूर होंगे।

'एक्सप्रेस' लिखता है कि प्रस्तावित कानून हिंदू समुदाय के लिए एक सकारात्मक संदेश है, जिससे उनमें पाकिस्तानी संविधान के तहत समानाधिकार नागरिक होने का भरोसा और मजबूत होगा।

अखबार कहता है कि इस कानून से न सिर्फ हिंदू लड़कियों से जबरन शादियों की समस्या खत्म करने में मदद मिलेगी, बल्कि उनके शादी-ब्याह के मामलों को पूरी तरह संवैधानिक संरक्षण मिलेगा।

वहीं 'रोजनामा पाकिस्तान' का संपादकीय है- पाक-भारत संबंध? देश को भरोसे में लें। अखबार की टिप्पणी है कि विवाद अपनी जगह हैं, लेकिन भारत के मौजूदा रूख में कोई लचक नहीं दिखाई देती।

अखबार की टिप्पणी है कि भारत की सरकार अपनी पार्टी के कट्टरपंथी नेताओं को पाकिस्तानी विरोधी, मुसलमान विरोधी बयान देने और अल्पसंख्यकों से बुरे बर्ताव से भी नहीं रोकती है। उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

अखबार की टिप्पणी है कि ऐसे में पाकिस्तान सरकार को भारत के साथ दोस्ती और रिश्तों को लेकर पूरी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए गौर करना चाहिए।

वहीं कई अखबारों ने पाकिस्तान के पुलिस थानों में फैले भ्रष्टाचार को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी पर संपादकीय लिखे हैं। 'मशरिक' लिखता है कि यह बात किसी से नहीं छुपी है कि थाने करोड़ों में बिकते हैं और एसएचओ करोड़ों में तैनात किए जाते हैं। लेकिन एक अदालती सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश का इन बातों का कहना, इन पर मुहर लगाता है।

अखबार कहता है कि कानून और जवाबदेही का निजाम ठीक से काम करे तो फिर किसकी मजाल है कि थानों की बोली लगाए और एसएचओ करोड़ों  देकर थाने हासिल करें और दिन रात भ्रष्टाचार करके अदा की गई अपनी रकम की वसूली करें और फिर मुनाफा कमाए।


हेडली पर पाक मीडिया

pakistan hindu marriage registration bill

रुख भारत का करें तो मुंबई हमलों के मामले में अमेरिका से चरमपंथी डेविड हेडली की गवाही पर काफी कुछ लिखा जा रहा है। 'हमारा समाज' का संपादकीय है-हेडली की गवाही पर पाक की बेचैनी।

अखबार के मुताबिक हेडली ने मुंबई हमलों में पाकिस्तान के शामिल होने को लेकर कई राज़ों पर से परदा हटाया है, हालांकि पाकिस्तान ने हेडली की गवाही को महज झूठ का पुलिंदा करार दिया है।

अखबार कहता है कि पाकिस्तान यह क्यों नहीं मानता कि हेडली किसी दबाव में बयान नहीं दे रहा है, बल्कि अमरीका से स्वतंत्र तौर पर गवाही में शामिल हुआ है।

अखबार ने पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहमान मलिक को आड़े हाथ लिया है, जिनके मुताबिक हेडली को भारत की खqफिया एजेंसी रॉ ने खड़ा किया है ताकि पाकिस्तान को बदनाम किया जा सके।

वहीं 'हिंदोस्तान एक्सप्रेस' लिखता है कि अगर पाकिस्तान की सरकार का दहशतगर्दी से लड़ने का इरादा पक्का होता तो वो कार्रवाई करने के लिए उसकी गवाही को ही काफी मानती।

नेता भी कहते हैं, जज भी कहते हैं

pakistan hindu marriage registration bill

अखबार कहता है कि विश्व समुदाय ने जैश-ए-मुहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे गुटों को दहशतगर्दों की सूची में शामिल किया है। इसके बावजूद पाकिस्तान सरकार ने हाफ‌िज सईद और जकीउर रहमान लखवी जैसों को खुले आम घूमने की छूट दे रखी है।

वहीं पिछले दिनों एक मजिस्ट्रेट के लॉन की घास चरने पर एक बकरी को पकड़े जाने पर 'रोजनामा खबरें' ने संपादकीय लिखा – बेचारी बकरी।

अखबार लिखता है कि नेता भी कहते हैं, जज भी कहते हैं और यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी कहते हैं कि कानून सबके लिए बराबर होता है, लेकिन जब एक बकरी को पकड़ा किया गया तो ख्याल आया कि कानून सबके लिए बराबर होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed