कश्मीर नीति में पाक कर रहा बड़ा बदलाव
जम्मू-कश्मीर चुनाव में अलगाववादियों को ठेंगा दिखाकर आवाम की चुनाव में सफल हिस्सेदारी और घाटी में लोकतंत्र की मजबूत होती जड़ से परेशान पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां अपनी कश्मीर नीति में बड़ा बदलाव कर रही हैं।
भारतीय एजेंसियों ने भी पाकिस्तान के संभावित पैतरों को भांपते हुए काट की तैयारी शुरू कर दी है। खुफिया एजेंसियों ने सरकार को सतर्क किया है कि इस सफल चुनाव के बाद राज्य में ठोस और स्थायी सरकार नहीं बन पाई तो पाकिस्तान को घाटी में नए जटिल हालात पैदा करने में काफी मदद मिलेगी।
खुफिया एजेंसी (आईबी) के एक उच्चपदस्थ सूत्र ने अमर उजाला को बताया कि जम्मू-कश्मीर में 1987 के चुनाव में धांधली के आरोपों और लोकतंत्र के असफल प्रयोग ने पाकिस्तान को घाटी में आतंकवाद की जड़ जमाने का मौका दे दिया था।
घाटी में कमजोर सरकार बनेगा पाक का हथियार
अब इतनी मशक्कत के बाद 2014 के निर्भीक, निष्पक्ष और जबरदस्त उत्साह में हुए चुनाव ने घाटी में नई उम्मीद पैदा की है। आतंकवाद और अलगाववाद के ऊब चुके लोगों ने फिर से बैलेट का सहारा लिया है। यह भारतीय खुफिया एजेंसी की बड़ी जीत है।
सूत्रों के मुताबिक अब जनता को अगर राज्य और केंद्र सरकार के धोखे का एहसास हुआ तो फिर बैलेट की जगह बुलेट लाने की पाकिस्तान हर संभव कोशिश करेगा।
पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर मामले से जुड़े खुफिया अधिकारी ने बताया कि चुनाव नतीजे में घाटी और जम्मू के बीच सांप्रदायिक आधार पर वोटों का बंटवारा फिलहाल सबसे कमजोर कड़ी है।
सूत्रों के मुताबिक प्राकृतिक आपदा के असर से जूझ रहे लोग संभावित सरकार की ओर बहुत उम्मीद से देख रहे हैं।