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कश्मीर को लेकर पाक ने फिर चली नापाक चाल

Mon, 18 Aug 2014 03:06 PM IST
दिल्ली/अमर उजाला, ब्यूरो
दिल्ली/अमर उजाला, ब्यूरो Updated Mon, 18 Aug 2014 03:06 PM IST
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pak envoy invites extremist leader to tald on kashmir

पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भारत और पाकिस्तान के बीच 25 जुलाई को होने वाली विदेश सचिव स्तर की वार्ता से पहले कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को विचार विमर्श के लिए बुलाकर नया विवाद पैदा कर दिया है।

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भाजपा ने जहां बासित के इस फैसले को अनुचित, दुर्भाग्यपूर्ण और उकसाने वाला करार दिया है। वहीं, कांग्रेस ने सरकार की कूटनीति पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा है कि पाकिस्तानी उच्चायुक्त के कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को वार्ता के लिए बुलाए जाने की स्थिति में भारत क्यों विदेश सचिव स्तर की बैठक करने जा रहा है।
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उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने विदेश सचिव स्तर की वार्ता से पहले कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को 19 अगस्त को विचार विमर्श का न्यौता दिया है।

निमंत्रण पाने वालों में हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक, हुर्रियत के चरमपंथी धड़े के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी, हुर्रियत के तीसरे धड़े के शब्बीर अहमद शाह और जेकेएलएफ के अध्यक्ष यासीन मलिक शामिल हैं।

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पाकिस्तान के इस कदम से क्यों चुप है सरकार

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मीरवाइज उमर फारूक के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें पाकिस्तानी उच्चायुक्त की तरफ से निमंत्रण मिला है। वहीं, गिलानी के प्रवक्ता ने कहा कि वह मंगलवार की सुबह वार्ता के लिए दिल्ली जाएंगे।

बासित के इस कदम से दोनों देशों के रिश्तों पर अरसे से जमी बर्फ पिघलाने के लिए होने वाली वार्ता से पहले ही विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि बासित के इस कदम पर फिलहाल चुप है, मगर कांग्रेस ने सरकार पर तत्काल सीधा हमला बोला है।

बसपा प्रमुख मायावती ने पाकिस्तान के इस कदम की आलोचना करते इस फैसले को दोनों देशों के रिश्ते के लिए अशुभ संकेत करार दिया हैं। वहीं, भाजपा ने इसे उकसाने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण कदम बताया है।

कांग्रेस ने क्या कहा इस मामले पर?

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने सरकार की कूटनीति पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि अलगाववादी नेताओं से बातचीत के फैसले के बाद सरकार विदेश सचिव स्तर की वार्ता क्यों करने जा रही है। उन्होंने अलगाववादी नेताओं के साथ बासित की बैठक पर सरकार से चुप्पी तोड़ने की मांग की।

दूसरी ओर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भाजपा और सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। खुर्शीद ने कहा कि भाजपा हमेशा कहती थी कि आतंकवाद और वार्ता साथ साथ नहीं हो सकती।

क्या वह सब कुछ भूल गई है। उधर भाजपा ने भी अलगाववादी नेताओं के साथ बैठक पर गहरी आपत्ति दर्ज की है। पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि संबंध बेहतर बनाने की कोशिशों के बीच इस प्रकार का प्रयास सर्वथा अनुचित और अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि इससे वार्ता से पहले नकारात्मक माहौल बनेगा।

किन्हें मिला है निमंत्रण?

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निमंत्रण पाने वालों में हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक, हुर्रियत के चरमपंथी धड़े के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी, हुर्रियत के तीसरे धड़े के शब्बीर अहमद शाह और जेकेएलएफ के अध्यक्ष यासीन मलिक शामिल हैं।

अलगाववादी नेताओं से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की बातचीत के फैसले के बाद सरकार विदेश सचिव स्तर की वार्ता क्यों करने जा रही है। -मनीष तिवारी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता।

संबंध बेहतर बनाने की कोशिशों के बीच इस प्रकार का प्रयास सर्वथा अनुचित और अस्वीकार्य है। इससे वार्ता से पहले नकारात्मक माहौल बनेगा। -सुधांशु त्रिवेदी, भाजपा प्रवक्ता।

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