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'मुशर्रफ ने भी पार की थी नियंत्रण रेखा'
नई दिल्ली/इस्लामाबाद/एजेंसी
Updated Fri, 01 Feb 2013 09:52 AM IST
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कारगिल जंग के खलनायक और पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ ने न केवल भारत के खिलाफ युद्ध की योजना बनाई थी, बल्कि दोनों देशों के बीच बनी नियंत्रण रेखा (एलओसी) को भी पार किया था।
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पाकिस्तान के एक रिटायर्ड कर्नल की किताब ‘विटनेस टू ब्लंडर: कारगिल स्टोरी अनफोल्ड्स’ में यह खुलासा किया गया है। सेवानिवृत्त कर्नल अशफाक हुसैन कारगिल युद्ध के दिनों में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के जनसंपर्क विभाग आईएसपीआर में डिप्टी डायरेक्टर थे।
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उन्होंने किताब में इस युद्ध को मुशर्रफ की बड़ी भूल करार देते हुए लिखा है : 28 मार्च 1999 को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मुशर्रफ अपने कुछ अधिकारियों के साथ ‘जकारिया’ पोस्ट गए थे, जो नियंत्रण रेखा से 11 किलोमीटर आगे है। इस पोस्ट पर तब 12 नार्दर्न लाइट इन्फेंट्री ने कब्जा कर रखा था। उल्लेखनीय है कि मई से जुलाई 1999 तक दोनों देशों के बीच कारगिल युद्ध हुआ था। जिसमें पाकिस्तान को हार का मुंह देखना पड़ा था।
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इन दिनों पाकिस्तान में कारगिल युद्ध को लेकर उसकी सेना के रिटायर्ड लेफ्टीनेंट जनरल शाहिद अजीज के खुलासों के बाद तूफान मचा हुआ है। अजीज ने मुशर्रफ के उन दावों को झूठा करार दिया कि युद्ध में आतंकी लड़े थे।उन्होंने कहा है कि यह युद्ध पाकिस्तानी सेना ने लड़ा था। इसी कड़ी में हुसैन की इस किताब भी चर्चा है। जबकि यह 2008 में आई थी। इस किताब के दावों पर पाकिस्तान के जियो टीवी ने हुसैन से लंबी बातचीत की।
इसमें रिटायर्ड कर्नल ने कहा कि मुशर्रफ ने सीमा पार ही एक रात भी गुजारी थी। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के सैनिकों ने हिस्सा लिया था। पूर्व पाक अधिकारी ने कहा कि युद्ध का इरादा भारत को सियाचिन से बेदखल करना था।
किताब में अशफाक हुसैन ने पाकिस्तानी सेना की पूरी तैयारियों का जिक्र करते हुए कहा है कि भारत को इसकी भनक नहीं थी। उसे ‘बाई चांस’ खबर हो गई थी। इससे पाकिस्तान के इरादे ध्वस्त हो गए। हुसैन के अनुसार पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को मुशर्रफ ने युद्ध की तैयारियों पर अंधेर में रखा था। हुसैन ने दावा किया कि शरीफ को तो युद्ध का तब पता चला जब वाजपेयी ने इस संबंध में फोन पर जानकारी दी।
अब मुशर्रफ बोले, कारगिल जंग बड़ी सफलता
इधर परवेज मुशर्रफ ने दावा किया है कि कारगिल युद्ध पाक सेना के लिए बड़ी उपलब्धि था। एक्सप्रेस न्यूज चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर नवाज शरीफ जंग के समय अमेरिका न गए होते तो पाकिस्तानी सेना भारत के 300 वर्ग मील इलाके को अपने कब्जे में ले लेती।’ जब सारे राज खुल चुके हैं तो मुशर्रफ ने कारगिल में पाक सेना के मिशन का बचाव किया है।
मुशर्रफ ने कारगिल जंग के राज से परदा उठाने वाले रिटायर्ड लेफ्टीनेंट जनरल शाहिद अजीज के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि यह जरूरी नहीं था की सेना के सभी कमांडरों को इसकी जानकारी दी जाती। हालांकि अपनी आत्मकथा ‘इन द लाइन ऑफ फायर’ मुशर्रफ ने स्वीकार किया है कि कारगिल जंग में पाक सेना शामिल थी।
कारगिल पर न्यायिक आयोग बनाने की मांग
पाकिस्तान में विपक्ष के नेता चौधरी निसार ने कारगिल युद्ध पर अपने देश में न्यायिक आयोग के गठन की मांग की है। इस्लामाबाद में उन्होंने कहा कि शाहिद अजीज के दावों से साफ हो चुका है कि जनरल मुशर्रफ ने बिना सेना को विश्वास में लिए सैकड़ों पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के मुंह में धकेल दिया। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।