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'मन की बात' से पहले मोदी जी, जानिए किसानों के मन का दर्द

Wed, 18 Mar 2015 09:28 PM IST
अमर उजाला नेटवर्क/नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क/नई दिल्ली Updated Wed, 18 Mar 2015 09:28 PM IST
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pain of farmer pm modi must know.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किसानों से ‘मन की बात’ करने वाले हैं। ऐसे में हाल में बेमौसम बारिश से हुई फसल की बर्बादी और ऐसी ही तमाम समस्याएं झेल रहे किसानों के मन की पीड़ा की कुछ बानगियां जानना भी जरूरी है। बारिश से उत्तर प्रदेश, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, मध्यप्रदेश, राजस्थान समेत देश के अधिकांश हिस्सों में कि सानों के मन-तन और खेत बेहाल हैं।

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कुछ राज्य सरकारों ने किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए मुआवजे की घोषणा तो की है, लेकिन यह मुआवजा उन तक कब और कितना पहुंचेगा, यह सवाल ही है। अभी तो राज्य सरकारें केंद्र से ही विशेष पैकेज की आस लगाए बैठी हैं। उल्टे, प्रक्रिया भी ऐसी है कि जिन राज्यों में फसलों के नुकसान की वजह से किसानों की सदमे में मौत हो गई, उनके परिवार सरकार और प्रशासन की नजर में मुआवजे के हकदार तक नहीं। अलबत्ता किसान की खुदकुशी पर सरकार मुआवजा बांटती रही है।
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इस कड़ी में झांसी के गरौठा के ग्राम नगरा की महिला किसान दुलैया का किस्सा भी जान लें। उसकी पोती की शादी इसी 7 मई को है। पति की पहले ही मौत चुकी थी। दो बेटे हैं और परिवार की आय का जरिया सात एकड़ की खेती ही है। दुलैया ने मटर बोई थी जो बारिश में तबाह हो गई। वह भी फसल की बर्बादी का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी और 16 मार्च को उसकी मौत हो गई। अब तक उसके परिवार को कोई सरकारी-प्रशासनिक मदद नहीं मिली है।
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हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की मौत के मामले में तत्काल पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। फसलों की तबाही को लेकर दो सौ करोड़ रुपये का प्रावधान भी यूपी सरकार ने किया है लेकिन प्रदेश के जिन इलाकों में किसानों की मौत हुई है, वहां अब तक प्रशासनिक अमला मदद करने या हाल जानने तक नहीं पहुंच सका है। किसानों की यह समस्याएं उस दिन पीएम के सामने भी होंगी, जब वह मन की बात करेंगे, लेकिन वह इनके समाधान के लिए क्या पहल कर पाते हैं, सवाल यही है।

सदमे से मौत के मामलों में नहीं मिलता मुआवजा

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इस सीजन में बारिश, ओले और पिछले वर्ष सूखे की मार झेल चुके किसानों को कोई मुआवजा सरकार से नहीं मिला है और न ही मिलने की उम्मीद है। प्रावधान है कि अगर किसान की बारिश, ओला, सूखे जैसी आपदा में 50 फीसदी से अधिक फसल नष्ट हो जाए तभी उसे सरकार की ओर से फसल को उगाने में किए निवेश के हिसाब से मुआवजा मिल सकता है।

मन की बात
-मोदी के ‘मन की बात’ के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। इसे भूमि अधिग्रहण बिल से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
-मोदी अपनी उपलब्धियां भी गिना सकते हैं। संसद में उन्होंने विदेश दौरे तक में किसानों के लिए किए गए प्रयास का जिक्र किया था
-मोदी हाल में किसानों के लिए शुरू किए मृदा परीक्षण कार्यक्रम से लेकर अन्य उपलब्धियों पर चर्चा कर सकते हैं।

किसानों द्वारा खुदकुशी के मामले
वर्ष------------किसानों ने दी जान
2012----------1,046
2013----------879
2014----------1,109

2012, 2013, 2014 में ऐसे 662 किसानों ने आत्महत्या की, जो सरकारी नीति के तहत एक लाख रुपये के मुआवजे के हकदार थे।
(स्रोत : मार्च 2015 को लोकसभा में मोहनभाई कुंडेरिया (कृषि राज्य मंत्री) द्वारा पेश किए गए आंकड़े )

नुकसान की भरपाई को तैयार सरकार : नकवी
केंद्र सरकार बेमौसम बरसात की वजह से किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा देगी। सरकार ने राज्यसभा में कहा कि आगरा और फिरोजाबाद में किसानों की आत्महत्याओं की घटना की समीक्षा की जा रही है। बुधवार को शून्य काल के दौरान विपक्ष की ओर से उठाए गए इस मुद्दे पर संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि उत्तर भारत में फरवरी और मार्च में हुई बारिश से किसानों को हुए किसी भी तरह के नुकसान की भरपाई करने को सरकार तैयार है। कांग्रेस सांसद मधुसूदन मिस्त्री और जदयू सांसद शरद यादव ने इस मामले को उठाते हुए सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया है।

सदमे से यूपी में किसानों की सबसे ज्यादा मौतें

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फसल की बर्बादी जैसे कारणों से सदमे में बड़ी संख्या में किसान जान गंवा रहे हैं। सदमे से यूपी में किसानों की सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं। लेकिन इन किसानों के परिवारों को सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली है। यहां तक कि कोई प्रशासनिक अधिकारी इन किसानों के परिजनों का हाल जानने तक नहीं पहुंचा है।

फतेहपुर सीकरी के महंदऊ गांव में किसान गंगाराम बघेल की फसल बर्बाद होने से सदमे से मौत हो गई। पुत्र डालचंद और ग्राम प्रधान मुकेश ने बताया कि गंगाराम के पास जमीन नहीं थी। वह बंटाई पर गांव के राकेश की जमीन को जोत रहा था। चार बीघे में आलू बोया था। खेत में पानी भरने से आलू की फसल बर्बाद हो गई। गंगाराम खेत और फसल की तबाही देखकर गश खाकर गिर पड़ा। कुछ देर में उसकी मौत हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। दो कमरे का टूटा फूटा मकान है।

एटा के जलेसर के गांव अकबरपुर सॉथा (अकराबाद) में 14 मार्च को आलू उत्पादक किसान हरेंद्र पाल (58) की सदमे से मौत हो गई। मिरहची के गांव जिन्हैरा में 16 मार्च को श्रीकृष्ण (60), जैथरा ब्लॉक के गांव नगला मोहन निवासी किसान दफेदार (55) की मौत हो गई। सहारनपुर के गंगोह के रंगेल गांव के किसान मेहर सिंह (45) की आठ मार्च को मौत हो गई थी। एक पखवाड़े के भीतर अलीगढ़ में पांच और हाथरस में दस किसानों की सदमे से जान जा चुकी है। अब तक इन जिलों के प्रशासन ने इन घटनाओं की जांच पड़ताल पूरी नहीं कराई है।

जम्मू कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों का भी मुआवजा बकाया

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जम्मू कश्मीर में भी बेमौसम बारिश की वजह से डेढ़ लाख हेक्टेयर की रबी की फसलें प्रभावित हुई हैं। कृषि मंत्री गुलाम नबी लोन का कहना है कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है। इसके बाद केंद्र से राहत पैकेज की मांग की जाएगी लेकिन सच तो यह है कि पिछले साल सितंबर में आई बाढ़ से प्रभावित किसानों को ही पूरा मुआवजा नहीं मिल पाया है। अभी भी पांच करोड़ रुपये का मुआवजा लंबित है।

हिमाचल ने पिछले साल मांगे थे 832 करोड़, मिले 112 करोड़
हिमाचल में भी गेहूं, मटर और अन्य नगदी फसलों को नुकसान पहुंचा है। मौसम की इस बेरुखी से इस बार सेब का सीजन भी देर से शुरू होने के आसार हैं। हिमाचल के किसानों-बागवानों को पिछले साल बारिश से हुई क्षति का अब तक हर्जाना नहीं मिल पाया है। पिछले साल प्रदेश सरकार ने केंद्र से 832 करोड़ की मांग की थी जिसमें से अभी तक केवल 112 करोड़ रुपये जारी किए गए। इस बार की बारिश से नुकसान का आकलन कराया जा रहा है।

पंजाब-हरियाणा में पैदावार कम होने के आसार
हरियाणा में इस साल 24.90 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुआई हुई है जो बीते वर्ष के 24.95 लाख हेक्टेयर से कम है। अब बारिश की वजह से उत्पादन काफी घटने की आशंका है। राज्य सरकार ने बारिश से खराब हुई फसलों के आकलन के आदेश जारी कर दिए हैं। आकलन पूरा होने के एक माह के भीतर मुआवजा देने का लक्ष्य तय किया गया है। बारिश और ओलावृष्टि से पंजाब में गेहूं के उत्पादन में पांच फीसदी से भी ज्यादा कमी आ सकती है।

बीमा कंपनियों का भी खेल
बांदा जिले के अरबई गांव के प्रेम सिंह ने 2013 में खरीफ फसल के लिए पंजाब नेशनल बैंक से केसीसी के जरिए दो लाख रुपये लिए थे। बैंक ने खरीफ फसल के बीमा के लिए 5250 रुपये और 5114 रुपये का प्रीमियम काट लिया। इसी तरह रबी की फसल में 8687 रुपये का प्रीमियम काट लिया है। लेकिन बीमा कंपनी ने आज तक इस किसान को एक पैसा नहीं दिया। किसान शिवनारायण सिंह (बड़ोखर खुर्द) ने इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से केसीसी के जरिए तीन लाख रुपये लिए थे। बीमा कंपनी ने खरीफ फसल का प्रीमियम 1381 रुपये बीते अगस्त माह में काट लिया। इस वर्ष सरकार ने धान की फसल को सूखा भी घोषित कर दिया। इसके बाद भी आज तक किसान को बीमा राशि के नाम पर एक पैसा नहीं मिला।

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