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न्याय को निचली अदालत का रूख करेंगे पचौरी!

Mon, 23 Feb 2015 07:48 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 23 Feb 2015 07:48 PM IST
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Pachauri likely to move the trial court for relief

एक महिला कर्मचारी के यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे द एनर्जी एंड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट (टेरी) के महानिदेशक आर के पचौरी ने दिल्ली हाईकोर्ट से अपनी जमानत याचिका को वापस ले लिया है। अनुमान है कि वो राहत पाने के लिए निचली अदालत का रूख कर सकते हैं।

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जस्टिस एस पी गर्ग की अदालत से समक्ष दायर की गई जमानत याचिका को कॉज सूची से हटा लिया गया है क्योंकि पचौरी अब निजली अदालत के जरिए राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं।
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अग्रिम जमानत पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद जस्टिस गर्ग ने गत 19 फरवरी को पचौरी की गिरफ्तारी पर अंतिरिम सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश दिया था।
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यह आदेश पारित करने से पहले अदालत ने पचौरी को सलाह दी थी कि वो निचली अदालत से सक्षम जज के समक्ष जमानत अर्जी दाखिल कर दें।

गौरतलब है कि इससे पहले हाइकोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन किया था जिसमें मीडिया को यह सलाह दी थी कि जाने माने थिंक टैंक आर के पचौरी से संबंधित यौन उत्पीड़न की इस खबर का प्रकाशन न करें।

क्या था पूरा मामला?

Pachauri likely to move the trial court for relief

जाने-माने पर्यावरणविद और नोबल पुरस्कार विजेता आर के पचौरी पर यौन उत्पीडन का आरोप लगा। एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक महिला शोध विश्लेषक की शिकायत पर टेरी के महानिदेशक पचौरी के खिलाफ लोधी कालोनी थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

पुलिस ने उन पर यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा का हनन, घूरने और आपराधिक मंशा रखने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। गौरतलब है कि पचौरी इंटरगवर्नमेंटल पेनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के 2002 से ही प्रमुख हैं जिसे 2007 में संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार मिला था।

वहीं पचौरी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि उन्हें फंसाया जा रहा है। पचौरी ने अपने कंप्यूटर संसाधन के दुरुपयोग की भी आशंका जताई। पचौरी ने बताया कि उन्होंने किसी महिला को कोई आपत्तिजनक मेल नहीं किया है और यह सब साइबर अपराधियों की साजिश है।

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