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'प्रधानमंत्री मोदी के सुझाव को सुप्रीम कोर्ट का झटका'

Sat, 02 Aug 2014 09:04 PM IST
Updated Sat, 02 Aug 2014 09:04 PM IST
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pace of justice delivery system in country not satisfactory: sc

जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को जल्द निपटाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव से इतर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि सिर्फ सांसदों के मामलों को फास्ट ट्रैक नहीं किया जा सकता। उनके मामलों को तरजीह देकर उन्हें अन्य लंबित आपराधिक मामलों से अलग नहीं रखा जा सकता।

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आपराधिक न्याय तंत्र की कछुआ चाल पर चिंता जताते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि आपराधिक मुकदमों को लंबे समय तक लंबित रहना सुशासन और लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। उसने केंद्र से मुकदमों के निपटारे में तेजी लाने के लिए चार सप्ताह में नीति बनाने को कहा।
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चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि समस्या का समाधान महज एक वर्ग के मामलों को फास्ट ट्रैक में डालना नहीं, बल्कि पूरे तंत्र के लिए उपाय खोजने से निकलेगा। मुझे यह कहते हुए खेद है, लेकिन आपराधिक न्याय तंत्र उस गति से नहीं चल रहा है, जिस तरह से उसे चलना चाहिए। हमें और अदालतों और ढांचागत सुविधाओं को बेहतर करने की जरूरत है।

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'मैं और अदालतें गठित नहीं कर सकता'

pace of justice delivery system in country not satisfactory: sc

शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि महिला और वरिष्ठ नागरिक जैसे कई वर्ग हैं जिनके मुकदमों को जल्द निपटाने की जरूरत है। कुछेक संवेदनशील मामलों को विशेष अदालतों में डालने के बजाय पूरे आपराधिक न्याय तंत्र को कैसे फास्ट ट्रैक किया जाए, इस संबंध में केंद्र सरकार चार सप्ताह में ठोस प्रस्ताव दे। पीठ ने अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा कि केंद्र सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और विधि सचिवों के साथ नीति बनाए।

न्यायपालिका के पास यह अधिकार नहीं कि वह तेजी से ट्रायल चलाने के लिए और अदालतें गठित करे। पीठ के अध्यक्ष ने कहा कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया होते हुए भी मेरी सीमाएं हैं, मैं और अदालतें गठित नहीं कर सकता।

पीठ में जस्टिस कुरियन जोसफ और जस्टिस आरएफ नरीमन भी शामिल थे। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि आपराधिक मामला 10 साल तक लंबित रहे, यह लोकतंत्र के लिए अच्छा शगुन नहीं है।

पीएम ने दिया था फास्ट ट्रैक कोर्ट का सुझाव

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अदालत लंबे अरसे से भारतीय जेलों में बंद पाकिस्तानी कैदियों के मसले पर भीम सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कहा कि उसने नवंबर, 08 में इस याचिका से संबंधित मामलों को एक साल में निपटाने को कहा था, लेकिन वे अब भी लंबित हैं।

राजनीति के अपराधीकरण में कमी लाने के लिए मोदी ने सांसदों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का निपटारा जल्द किए जाने की जरूरत बताई थी।

उन्होंने 11 जून को कहा था कि अपराधियों के लिए संसद में जगह नहीं हो सकती। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि सांसदों के खिलाफ लंबित मामलों को एक साल में निपटाने के लिए वह कदम उठाए।

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