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तीसरे ट्रायल में फेल हुई स्वदेशी बोफोर्स

Sat, 31 Aug 2013 12:07 AM IST
कानपुर/संजय त्रिपाठी
कानपुर/संजय त्रिपाठी Updated Sat, 31 Aug 2013 12:07 AM IST
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p155 bofors failed in third trial

रक्षा मंत्रालय के बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पी-155 (स्वदेशी बोफोर्स) पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इसके पीछे इस तोप का तीसरे ट्रायल में फेल होना अहम वजह बताया जा रहा है।

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बीते दिनों पोकरण में चल रहे ट्रायल में इस गन की बैरल फायरिंग के दौरान फट गई। इस दुर्घटना पर सेना ने उच्चस्तरीय जांच बिठाई है।

बीती दस अगस्त को राजस्थान के पोकरण में स्वदेशी बोफोर्स का ट्रायल किया जा रहा था। ट्रायल के लिए कानपुर के कालपी रोड स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री और फील्ड गन फैक्ट्री से तोपें भेजी गई थीं।
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आधिकारिक सूत्र के मुताबिक फील्ड गन फैक्ट्री की तोपों के सफल ट्रायल होने के बाद दो तोपों के ट्रायल भी सफल रहे। तीसरी तोप में भी दो गोले सफलतापूर्वक दाग गए, मगर तीसरे फायर में तोप की बैरल फटकर दो टुकड़े हो गई।
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इस दुर्घटना से मौके पर मौजूद दो-तीन सुरक्षाकर्मियों को मामूली चोट भी आई। ट्रायल के दौरान मौजूद आर्मी अफसरों ने इसके पीछे फैक्ट्री को जिम्मेदार ठहराते हुए कड़ी आपत्ति जताई। साथ ही इस दुर्घटना पर उच्चस्तरीय जांच बैठा दी गई।

सूत्र बताते हैं कि तीसरे फायर के दौरान जो गोला तोप में डाला गया था, वह 2001 में बना था। माना जाता है कि बारूद की उम्र अधिकतम पांच वर्ष होती है।

इससे पहले भी पोकरण और इटारसी में तोप का ट्रायल हुआ था, जो पूरी तरह सफल रहा था। फिलहाल सीमा पर तनाव को देखते हुए मामले को बेहद गोपनीय रखा गया है।

इसके चलते कोई भी अधिकारी इस पर बोलने को तैयार नहीं है। जांच के सिलसिले में आर्मी की टीम जल्द ही कानपुर आने वाली है।

यहां वह अपने स्तर से तोप के निर्माण के विभिन्न चरणों को परखेगी। इसके बाद रक्षा मंत्रालय को पूरे मामले की रिपोर्ट सौंपेगी।

स्वीडन की बोफोर्स जिस तकनीक पर बनाई गई थी, उसी तकनीक पर आधारित इस स्वदेशी तोप के उम्दा होने का दावा किया जा रहा है। यह तोप 40 किलोमीटर तक गोला दागने की क्षमता रखती है। एक मिनट में आठ राउंड फायर कर सकती है।

रेत, पहाड़, मैदान हर जगह मोर्चा लेने में सक्षम है। तीन मिनट में 500 मीटर खिसककर दोबारा फायर कर सकती है। इसका बैरल छोटा है, लेकिन 155 एमएम के गोले से हाई एंगल फायर कर सकती है।


इस मामले की जांच आर्मी के स्तर से हो रही है। वे पूरे घटनाक्रम को बारीकी से देख रहे हैं। ज्यादा जानकारी उन्हीं से हो सकेगी।--एचएस चौधरी, चेयरमैन (ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड)

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