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अर्थ आवर: धरती को थोड़ा सुकून देने की एक पहल
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Fri, 22 Mar 2013 11:46 PM IST
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बढ़ती ऊर्जा खपत, ग्रीन हाउस गैसों के भारी मात्रा में उत्सर्जन और इससे तपती धरती के प्रति लोगों को सचेत करने के लिए 23 मार्च यानी शनिवार को दुनियाभर में रात साढ़े आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक बत्तियां बुझाकर अर्थ आवर मनाया जाएगा।
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इस बार अर्थ आवर में देश के 150 से ज्यादा शहरों की भागीदारी का अनुमान है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संस्था वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर की ओर से धरती पर जीवन की संभावनाएं बचाए रखने के लिए दुनियाभर में यह अभियान हर साल मार्च में चलाया जाता है।
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अर्थ आवर अभियान के सह संस्थापक एंडी रिडले के मुताबिक आधुनिक होती जीवनशैली में हर चीज ऊर्जा पर निर्भर हो रही है।
ऊर्जा खपत बढ़ने से ऊर्जा उत्पादन भी बढ़ रहा है जिससे ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो यह जलवायु परिवर्तन के खतरों को और बढ़ा देगा।
अभियान में भागीदारी
2 अरब लोगों का अनुमान 2013 में
1.8 अरब लोग जुड़े 2012 में
1.2 अरब लोगों की भागीदारी 2011 में
150 देश भारत के
7000 शहर दुनिया के
ये भी होंगे अंधेरे में
ताजमहल- आगरा
हार्बर ब्रिज- सिडनी
एफिल टावर- पेरिस
बकिंघम पैलेस- लंदन
बुर्ज खलीफा- दुबई
एंपायर स्टेट बिल्डिंग- न्यूयॉर्क
फेस ऑफ द कैंपेन: डेजी लो
ब्रिटेन की मशहूर मॉडल डेजी लो इस बार अर्थ आवर अभियान का चेहरा बनी हैं। डेजी ने अभियान के फोटो शूट के लिए अपने कंधे से आधे चेहरे को खासतौर से पेंट कराया है। इस पेंट वर्क में धरती के अंदर से निकलते फूल को उनके चेहरे पर खिलते हुए दिखाया गया है।
हमें इस बारे में और अधिक सजगता बरतने की जरूरत है। घर पर हम अपने बच्चों को सिखा सकते हैं कि जरूरत न होने पर लाइट और पंखे बंद कर दें। मेरा मानना है कि हर एक व्यक्ति बदलाव लाने की ताकत रखता है। मैं चाहूंगा की ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ें।
-अजय देवगन, अभिनेता
ऑस्ट्रेलिया से शुरुआत
अर्थ आवर अभियान की शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में वर्ष 2007 में हुई थी। ऑस्ट्रेलिया से अभियान शुरू होने की वजह यह थी कि यहां ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में ऊर्जा की हिस्सेदारी 69 फीसदी थी।