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क्वात्रोच्चि की मौत, दफन हुए बोफोर्स घोटाले के राज

Sun, 14 Jul 2013 01:34 AM IST
नई दिल्ली/मिलान/एजेंसी
नई दिल्ली/मिलान/एजेंसी Updated Sun, 14 Jul 2013 01:34 AM IST
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ottavio quattrocchi of bofors scam fame dies in italy

बोफोर्स घोटाले के प्रमुख आरोपी ओतावियो क्वात्रोच्चि की शुक्रवार को हार्ट अटैक से मौत हो गई।

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उसकी मौत के साथ ही 26 साल पुराने इस घोटाले के वे तमाम राज भी हमेशा के लिए दफन हो गए, जिन्होंने 1980 के दशक के आखिर में भारतीय राजनीति को हिलाकर रख दिया था। गांधी परिवार का करीबी क्वात्रोच्चि अंत तक कानून के शिकंजे से बचने में भी कामयाब रहा।

‘क्यू’ नाम से चर्चित रहे 74 वर्षीय विवादित कारोबारी क्वात्रोच्चि की मौत की पुष्टि इटली के मिलान शहर में उसके परिवार की ओर से की र्गई। बोफोर्स घोटाले में किसने दलाली ली और इस मामले में किस किस की भूमिका रही।
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क्वात्रोच्चि की मौत के बाद ऐसे कई अनसुलझे सवालों के जवाब अब शायद ही कभी मिल पाएं क्योंकि 64 करोड़ रुपये की दलाली के इस मामले में विन चड्ढा समेत ज्यादातर आरोपियों की अब मौत हो चुकी है।
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कौन था बोफोर्स घोटाले का 'सूत्रधार' क्वात्रोच्चि

मालूम हो कि इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर भी आरोप लगे थे। 1987 में बोफोर्स घोटाले के खुलासे पर क्वात्रोच्चि का नाम प्रमुख आरोपी के रूप में सामने आया था। 1989 के लोकसभा चुनाव में यह घोटाला अहम मुद्दा बना और कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

बाद में गिरफ्तारी से बचने के लिए क्वात्रोच्चि 1993 में भारत से फरार हो गया था। क्वात्रोच्चि को 2002 में मलयेशिया और 2007 में अर्जेंटीना में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सीबीआई उसे वहां से ला पाने में नाकाम रही। अन्य आरोपियों में क्वात्रोच्चि की पत्नी मारिया का भी नाम था।


कांग्रेस के केंद्र की सत्ता में वापस आने के बाद 2006 में लंदन में क्वात्रोच्चि के खातों पर से रोक हटा ली गई थी। बाद में सीबीआई ने वर्ष 2001 में उसके खिलाफ आरोपों को भी वापस लेने का फैसला किया।

क्या था बोफोर्स घोटाला

1986 में स्विस आर्म्स निर्माता कंपनी बोफोर्स ने हाविट्जर गन की सप्लाई के लिए भारत के साथ 1500 करोड़ रुपये का सौदा किया था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उनकी पत्नी सोनिया गांधी के करीबी दोस्त माने जाने वाले क्वात्रोकी पर इस सौदे में बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप लगा था।

इतालवी बिजनेसमैन पर आरोप था कि इस सौदे के बदले उसे दलाली की रकम का बड़ा हिस्सा मिला।

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