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अध्यादेशों पर अपने ही तीन मंत्रियों से घिरे मोदी

Thu, 08 Jan 2015 02:23 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 08 Jan 2015 02:23 PM IST
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8 Ordinance in 225 days of Modi government

क्या मोदी सरकार में अध्यादेश का राज चल रहा है? ये सवाल इसलिए क्योंकि सरकार गठन के महज 225 दिनों के भीतर सरकार 8 अध्यादेश ला चुकी है। यानी अगर औसत निकाला जाए तो सरकार ने 28 दिनों में एक अध्यादेश लेकर आई है।

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ऐसा नहीं है कि इस बार संसद का सत्र ठीक से चला नहीं हो। इस बार के शीतकालीन सत्र में कई मुद्दों पर मतभेद के बावजूद सदन ठीक ढंग से चला। इसके बाद भी नरेंद्र मोदी सरकार को अध्यादेश का रास्ता अख्तियार करना पड़ा। सरकार संसद के शीतकालीन सत्र के तुरंत बाद 8 अध्यादेश लेकर आ गई।
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अंग्रेजी समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मोदी सरकार के इस फैसले के खिलाफ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सवाल उठाए हैं।

राष्ट्रपति ने सरकार से पूछा है कि आखिर अध्यादेश की जरूरत क्या थी? खास तौर से भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 को लेकर अध्यादेश के पीछे सरकार की मंशा क्या है?
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कैबिनेट बैठक में सामने आए मतभेद!

8 Ordinance in 225 days of Modi government

29 दिसंबर को हुई कैबिनेट बैठक में भूमि अधिग्रहण को लेकर एक अध्यादेश लाया गया। हालांकि उस समय बैठक में मौजूद सरकार के दो मंत्रियों ने इस मुद्दे पर अपना विरोध जताया था।

उन्होंने विरोध के पीछे तर्क दिया कि अगर ऐसे ही अध्यादेश लाए जाते रहे और इस तरह के फैसले लिए जाते रहे तो इससे सरकार की इमेज पर असर पड़ेगा। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय भी कई विधेयक थे जिन्हें तत्कालीन सरकार संसद में पास नहीं करा सकी थी।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक ये शायद नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक थी जिसमें मंत्रियों के बीच मतभेद सामने आए थे। मंत्रियों ने कड़े शब्दों में अपना विरोध जताया था हालांकि उस समय भी प्रधानमंत्री मोदी की ही चली। जिसमें मंत्रियों के विरोध का आवाजें दब गई।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक 3 केंद्रीय मंत्रियों ने इस बात की तस्दीक की है कि बैठक में जमीन अधिग्रहण विधेयक को लेकर गरमागरम बहस हुई थी। उसमें मंत्रियों की ओर से साफ किया गया कि इस पर अध्यादेश के लिए राज्यों से बातचीत बहुत जरूरी है।

महज 225 दिनों में 8 अध्यादेश

8 Ordinance in 225 days of Modi government

कैबिनेट में विरोध के सुर के बीच अब इस अध्यादेश पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी सवाल उठाए हैं। राष्ट्रपति ने सरकार से इतनी जल्दबाजी में अध्यादेश लाने के पीछे की मंशा पूछी है।

इंडियन एक्सप्रेस के सूत्रों के मुताबिक दो मंत्रियों के विरोध के मद्देनजर ये मुमकिन है कि राष्ट्रपति इस अध्यादेश को वापस भेज दें।

दो मंत्रियों के अलावा एक और मंत्री ने सलाह दी है कि गैर-जरूरी अध्यादेशों को रोक कर बजट सत्र में इसे पास कराने की बात कही है। 29 दिसंबर के बाद 5 जनवरी को हुई कैबिनेट की बैठक में एक बार फिर से 3 मंत्रियों ने खनन अध्यादेश पर अपना विरोध जताया था।

इस मामले पर एक मंत्री ने बताया कि बैठक में शामिल कई मंत्रियों ने इन अध्यादेशों के समय को लेकर सवाल खड़े किए। लेकिन ज्यादातर मंत्रियों ने प्रधानमंत्री का समर्थन किया। इसके पीछे उनकी मंशा है कि इस अध्यादेश से निवेशकों को लुभाया जा सकेगा।

कैबिनेट बैठक में उठी आवाजें

8 Ordinance in 225 days of Modi government

जमीन अधिग्रहण, खनन के अलावा ई-रिक्शा को लेकर आए अध्यादेश पर भी सवाल खड़े किए गए थे। हालांकि ई-रिक्शा पर अध्यादेश के पीछे सरकार की मंशा है कि उसे दिल्ली विधानसभा चुनाव में इसका फायदा मिल सकता है।

इस अध्यादेश का सबसे ज्यादा समर्थन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया था। उनके मुताबिक इस अध्यादेश से हजारों के गरीब परिवारों को इसका फायदा मिलेगा।

फिलहाल अध्यादेशों को लेकर सरकार में मतभेद और राष्ट्रपति के सवाल उठाने के बाद अब सरकार का रूख क्या होगा, ये देखना दिलचस्प होगा।

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