एक साल के भीतर सभी राज्यों की जेलों में सीसीटीवी लगाने का आदेश
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जेल और हिरासत में मानवाधिकार के हो रहे उल्लंघनों को रोकने की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश की तमाम जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने इस काम को अंजाम देने के लिए सरकारों को एक साल का वक्त दिया है।
न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसके साथ ही सभी राज्यों को तमाम पुलिस स्टेशनों और लॉक अप में सीसीटीवी कैमरे लगाने पर विचार करने के लिए भी कहा है।
पीठ ने यह भी कहा कि जिन राज्यों में मानवाधिकार आयोग नहीं है, वहां उसका गठन किया जाए। इसके अलावा आयोगों में खाली पड़े पदों का जल्द नियुक्ति की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि हर थाने में कम से कम दो महिला कांस्टेबल की तैनाती होनी चाहिए।
हिरासत में हो रही मौतें
अदालत ने यह आदेश दिलीप के बसु द्वारा दाखिल जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिया है। याचिका में जेलों की स्थिति में सुधार लाने और राज्यों में मानवाधिकार आयोग के गठन की गुहार की गई थी।
मालूम हो कि कई राज्यों में मानवाधिकार आयोग का गठन अब तक नहीं हुआ है। इस मामले में नियुक्त अमाइकस क्यूरी वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी के सुझावों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने ये निर्देश दिए।
हिरासत में हो रही मौतों और कैदियों की हो रही प्रताड़ना को समाप्त करने के लिए ये सुझाव दिए गए थे। अदालत ने सिंघवी से सुझाव देने के लिए कहा था। मालूम हो कि तीन महीने पहले चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली के तमाम थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश दिए थे।