सत्ता पक्ष और विपक्ष में ठनी, संसद फिर से ठप
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संसद में सोमवार को एक बार फिर से हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस ने राज्यपाल की नियुक्ति और नगा मामले पर एनएससीएन से समझौते और सुषमा के इस्तीफे जैसे मुद्दे पर फिर से सवाल उठाए।
संसद से 25 कांग्रेसी सांसदों के निलंबन के पांच दिन पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद कांग्रेस ने संसद में विरोध प्रदर्शन जारी रखने का फैसला लिया। इस बीच सरकार और विपक्ष दोनों ही आर या पार के मूड में दिखाई दिए।
सोमवार को सदन में जैसी तस्वीरें सामने आई उससे साफ था कि लोकसभा स्पीकर के कांग्रेस के 25 सांसदों को निलंबन के बाद भी कांग्रेस सांसदों के रूख में बदलाव दिखाई नहीं दिया।
हालांकि लोकसभा में समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने जरूर सदन की कार्यवाही ठप करने के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने सदन चलने की वकालत भी की। इस बीच लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सभी दलों की बैठक बुलाई। जिससे की गतिरोध को टाला जा सके। हालांकि गतिरोध के चलते दोनों ही सदनों में कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी।
आखिर कब टूटेगा गतिरोध?
जहां एक ओर संसद में कार्यवाही ठप पड़ी है। कोई भी काम इस सत्र में अब तक नहीं हुआ। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष का रूख हमलावर बना हुआ है।
विपक्ष के तीखे और हमलावर रुख और असहमति के बीच सरकार ने अपने अहम बिलों की चिंता छोड़ विपक्ष पर सियासी पलटवार करने का निर्णय कर लिया है।
सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी सदन के बाहर तो सवाल पूछती है लेकिन सदन में पहुंचते ही जवाब नहीं सुनना चाहती। अरूण जेटली ने राज्यसभा में कांग्रेस के रवैये की आलोचना की। वहीं सदन के बाहर राजीव प्रताप रूडी ने भी कांग्रेस नेताओं के रवैये पर सवाल खड़े किए।
उल्लेखनीय है कि मानसून सत्र में राज्य सभा में अब तक कोई कामकाज नहीं हो पाया है, वहीं लोकसभा में विपक्ष के 25 सांसदों के निलंबन के बाद सरकार कुछ कामकाज निपटा पाई है। चूंकि राज्यसभा की कार्यवाही नहीं चल रही, इसलिए इस दौरान लोकसभा में पारित बिलों के भविष्य पर ग्रहण लग गया है।