फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   open letter to primeminister from shruti seth

श्रुति सेठ का खुला पत्र-प्रधानमंत्री जी, सेल्फी से बदलाव नहीं आता

Sat, 04 Jul 2015 01:11 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 04 Jul 2015 01:11 PM IST
विज्ञापन
open letter to primeminister from shruti seth

मैं ये पूरे राष्ट्र के नाम लिख रही हूं क्योंकि किसी एक व्यक्ति को सवा अरब लोगों की सोच बदलने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता बदलाव तभी आ सकता है जब व्यक्तिगत स्तर पर जागरुकता आए।

विज्ञापन


28 जून की सुबह मैंने #SelfiWithDaughter अभियान, जिसे प्रधानमंत्री का आशीर्वाद प्राप्त हुआ था, पर अपनी राय जाहिर करने की गलती की थी।

ज्यादातर लोगों को ये मुहिम और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरुकता का अच्छा तरीका लगा लेकिन मुझे ये विचार नहीं भाया। ये ध्यान रखें कि मेरी अपनी 11 महीने की बेटी है।

विज्ञापन

'मेरे खिलाफ नफरत भरे ट्वीट की सूनामी आ गई'

open letter to primeminister from shruti seth

जिस व्यक्ति को बदलाव का नया युग लाने वाला बताया जा रहा है, मैं उससे ऐसे तुच्छ सतही अभियानों की नहीं कुछ ठोस करने की उम्मीद करती हूँ। इसके बाद मैंने इससे भी बड़ी गलती अपने विचार ट्विटर पर सार्वजनिक करके की।

इसलिए मैंने ना सिर्फ सोचने की ही हिम्मत की बल्कि अपने विचार सार्वजनिक करने की हिम्मत भी की। और फिर, अगर शेक्सपियर के शब्दों में कहा जाए तो, नर्क के द्वार खुल गए। मेरे खिलाफ नफरत भरे ट्वीट की सुनामी आ गई।

ट्वीट में मुझे, मेरे परिवार को, मेरे मुसलमान पति को, मेरी 11 महीने की बेटी और एक अभिनेत्री के रूप में मेरे 'गिरते करियर', को निशाना बनाया गया।

विज्ञापन

'एक महिला के रूप में जो भी सम्मान है, वो छीन लिया'

open letter to primeminister from shruti seth

मैंने अपने प्रधानमंत्री को #SelfieObsesed (सेल्फी प्रेमी) कहा था और उनसे 'नौटंकी' के बजाए सुधार करने के लिए कहा था। क्या ये गलत था? क्या यह बहुत कठोर था? जाहिर तौर पर जो उनका और उनकी सरकार का समर्थन करते हैं उनके लिए यह गलती थी।

मेरा, एक कर चुकाने वाले भारतीय नागरिक का, इस देश की नीतियों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। मैंने उनकी सत्ता को चुनौती देने हिम्मत की। मैंने देश के सबसे बड़े दफ्तर (असल में जो राष्ट्रपति का है) का अपमान किया।

इसलिए मुझे सजा तो मिलनी ही चाहिए थी। सजा भी ऐसी जो ट्विटर पर गुमनामी का फायदा उठाने वाले लोग दे सकते हैं। महिलाओं और पुरुषों ने एक समान रूप से मेरे बारे में भद्दी से भद्दी बातें कहीं। मेरा किसी की बेटी के रूप में, एक पत्नी के रूप में, एक मां के रूप में और सबसे महत्पूर्ण एक महिला के रूप में जो भी सम्मान है, वो छीन लिया।

विज्ञापन

'शाबाश मर्दों, तुम्हारी बेटियों को तुम पर जरूर गर्व होगा'

open letter to primeminister from shruti seth

जो पुरुष कुछ मिनट पहले अपनी बेटियों के साथ सेल्फी पोस्ट कर रहे थे वो अगले ही पल मेरे बारे में अपमानजनक बातें कह रहे थे। मुझसे पूछ रहे थे कि मुझे अपने असली पिता का नाम पता है या नही।

सवाल कर रहे थे कि बचपन में मेरा यौन शोषण तो नहीं हुआ है जो मैं सेल्फी विद डॉटर का विरोध कर रही हूँ। और ये टिप्पणियां तो तुलनात्मक रूप से सभ्य हैं।

शाबाश मर्दों, तुम्हारी बेटियों को तुम पर जरूर गर्व होगा। महिलाएं, जिन्हें एक दूसरे को सशक्त करना चाहिए, मुझसे पूछ रहीं थीं कि क्या मैं वेश्या हूँ और क्या मैं अपनी बेटी को भी वेश्या बनाना चाहती हूँ?

और क्या मैं प्रधानमंत्री के नाम का इस्तेमाल कर अपने नाकाम करियर में दोबारा जान फूंकना चाहती हूँ और सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहती हूँ।

'आपकी बेटी के साथ ऐसा किया जाता तो आपको कैसा लगता'

open letter to primeminister from shruti seth

मैं ये सोचकर ही कांपती हूँ कि आपके बेटों के मन में महिलाओं के प्रति कितना सम्मान होगा। तो सवाल यह है कि अपनी बेटियों के साथ सेल्फी लेने से क्या होगा जब आप खुद ही उनके पलने-बढ़ने के लिए जहरीला माहौल बना रहे हैं।

तस्वीर लेने से हमारे समाज में भीतर तक घुसी पितृ-सत्तात्मकता और महिलाओं के प्रति नफरत कैसे कम हो जाएगी?

आप बेटियों की संख्या बढ़ाने की चिंता क्यों करते हैं जब आप उनके साथ इतना बुरा व्यवहार करते हैं और असम्मान से पेश आते हैं वो सब जो 48 घंटों तक मेरे पीछे पड़े रहे, क्या एक पल के लिए ये सोचेंगे कि मैं भी किसी की बेटी हूँ।

क्या आपने खुद से कभी ये पूछा कि अगर आपकी बेटी के साथ ऐसा किया जाता तो आपको कैसा लगता? मैं जानती हूँ कि इसका उत्तर ना है क्योंकि आप सब तो तस्वीरें खिंचाने में और अपनी #SelfieWithDaughter पर लाइक और रिट्वीट बटोरने में व्यस्त थे।

'प्रधानमंत्री जी कोशिश कीजिए और एक तस्वीर से बड़े बनिए'

open letter to primeminister from shruti seth

जहाँ तक हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री का सवाल है। मैं उनसे सिर्फ यही कहना चाहती हूँ, प्रिय सर, अगर आप सच में महिलाओं को सशक्त करना चाहते हैं तो मैं आपसे गुज़ारिश करती हूँ कि आप अपने नाम से ऐसे नफ़रत फ़ैलाए जाने की आलोचना करें।

मुझे खेद है कि मैंने प्रतिक्रियाओं के बाद अपनी शुरुआती ट्वीट डिलीट कर दी।लेकिन मैंने जो कहा मैं उस पर अडिग हूँ और दोहराती हूँ कि "सेल्फी से बदलाव नहीं आता है, सुधारों से आता है। इसलिए कोशिश कीजिए और एक तस्वीर से बड़े बनिए।"

और जहाँ तक इस अभियान के बारे में मेरी शुरुआती राय का सवाल है कि ये कुछ नहीं सिर्फ दिखावा है, मैं जानकर दुखी हूँ कि अंततः मेरी राय ही सच साबित हो गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed