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यौन हिंसा से महिलाओं की रक्षा के लिए सीजेआई का मंत्र

Sun, 16 Nov 2014 02:20 PM IST
एजेंसी/बंगलूरू
एजेंसी/बंगलूरू Updated Sun, 16 Nov 2014 02:20 PM IST
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only tough law can't protect women from sex crime says justice hl dattu

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने शनिवार को कहा कि यौन हिंसा से महिलाओं की रक्षा केवल सख्त कानूनों से नहीं की जा सकती है।

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इस समस्या से निपटने के लिए एक समग्र और व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाना होगा। साथ ही उन्होंने परिवार नियोजन योजनाओं को लागू करने में सरकार के रवैये पर अपनी नाराजगी जताई।
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जस्टिस दत्तू ने कहा कि यौन हिंसा एक गंभीर मसला है और यदि देश को इस बुराई को खत्म करना है तो तत्काल कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि सख्त कानूनों से यौन हिंसा में कमी आएगी जैसे कि गहरे जख्म में मरहम से कुछ राहत मिलती है।
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इस दौरान उन्होंने बिलासपुर में हुए नसबंदी हादसे का भी जिक्र किया और परिवार नियोजन को लेकर सवाल खड़े किए।

महिलाओं की प्रजनन स्वायत्तता

only tough law can't protect women from sex crime says justice hl dattu

महिला वकीलों के अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन के 35वें सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमारा समाधान केवल कड़े कानूनों तक सीमित नहीं हो सकता। केवल सख्त कानून यौन हिंसा के खिलाफ महिलाओं की रक्षा नहीं कर सकते हैं। यौन हिंसा से निपटने के लिए समग्र और व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाना होगा।

परिवार नियोजन योजनाओं पर सरकारों के रवैये पर अपनी नाराजगी जताते हुए जस्टिस दत्तू ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक नसबंदी कैंप में 13 महिलाओं की मौत हमारे लिए एक गंभीर चेतावनी है।

यह परिवार नियोजन के प्रति सरकारों के रुख के बारे में बहुत गंभीर और अहम सवाल खड़े करती है। देश के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि महिलाओं की प्रजनन स्वायत्तता में संवैधानिक सुरक्षा के उच्चतम मानदंडों का पालन होना चाहिए।

जस्टिस दत्तू ने कहा कि जबरदस्ती नसबंदी एक भूत की तरह है और सही मायनों में चिंताजनक है। देश को नसबंदी के अस्वीकार्य मॉडल को स्वीकार करने के खिलाफ सवाल उठाने की जरूरत है।

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