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सिर्फ राहुल सुना सकते हैं मां का इमोशनल किस्सा...
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 18 Oct 2013 12:42 PM IST
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कांग्रेस इन दिनों 'मां' के इमोशनल किस्से पर दोहरा रवैया अपना रही है। एक तरफ पार्टी के युवराज वोट बटोरने के लिए रैलियों में अपनी 'मां' से जुड़े प्रसंग सुना रहे हैं, वहीं जब कार्यकर्ताओं ने इसका जिक्र किया, तो उन्हें निलंबित कर दिया गया।
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों चुनावी रैलियों में अपनी मां को लेकर जो बयान दे रहे हैं, उससे कई सवाल खड़े होते हैं।
गुरुवार को मध्य प्रदेश के शहडोल में उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा बिल पास होने के दौरान संसद में मेरी मां सोनिया की तबियत बिगड़ गई थी। मां, शैलजा कुमारी के साथ बाहर निकल गईं। मैं संसद में उन्हें देखने गया।
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उन्होंने कहा, "वहां मां और शैलजा बैठी थीं। मैंने पूछा इतनी जरूरी क्या बात हो रही है। तब मुझे पता चला कि मां की तबीयत खराब है। मैंने कहा अगर तबियत खराब है तो अस्पताल चलते हैं। उन्होंने कहा कि मैं यहां से नहीं जाऊंगी। मां ने अस्पताल जाने से मना कर दिया। मैंने पूछा क्यों नहीं जाएंगी। उन्होंने कहा कि बिल पास होने से पहले मैं यहां से नहीं जाऊंगी।"
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इससे पहले भी जयपुर में उपाध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद राहुल ने सोनिया गांधी का जिक्र बड़े जज्बाती अंदाज में किया था।
उन्होंने कहा था कि एक रोज सोनिया उनके कमरे में आईं और कहा कि राजनीति ने उनका काफी नुकसान किया है, कई अपनों के खोया है।
राहुल ने कहा था कि उन्होंने सोनिया की आंखों में उस रोज आंसू देखे थे।
जाहिर है राहुल अपनी जज्बाती भाषण को हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि यह अधिकार कांग्रेस में सिर्फ उन्हीं को है।
हाल में फूलपुर में कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारियों ने एक बैनर लगाया जिस पर लिखा था, "मइया अब रहती बीमार, भइया पर बढ़ गया भार, प्रियंका तुम बनो उम्मीदवार।"
कांग्रेस की स्थानीय इकाई चाहती थी कि वहां से प्रियंका गांधी को उम्मीदवार बनाया जाए, इसलिए उन्होंने अपने स्टाइल में यह बात रखी।
पार्टी आलाकमान को यह बात नागवार गुजरी कि सोनिया की बीमारी का जिक्र उनके अपने कार्यकर्ताओं ने किया।
लेकिन कांग्रेस इससे सख्त नाराज हुई और अगले ही रोज ऐसा करने वाले दोनों नेताओं को निलंबित कर दिया गया है। यह बात और है कि वे दोनों बाद में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।