'24 साल में 26 लोगों को फांसी ,मुस्लिम सिर्फ चार'
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देश में 1991 से अब तक सिर्फ 26 लोगों को फांसी दी गयी है जिसमें मुस्लिमों की गिनती मात्र 4 ही है। बावजूद इसके ऐसा भ्रम फैलाया जा रहा है जैसे सरकार के निशाने पर सिर्फ मुस्लिम आबादी है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में सरकारी सूत्रों के हवाले से छपी खबर में यह बात कही गई है। ख्ाबर के अनुसार याकूब की फांसी के बाद कुछ मीडियावालों ने ऐसा माहौल बना दिया है जैसे सरकार सिर्फ मुस्लिम समुदाय को ही निशाना बना रही है।
आई एंड बी मंत्रालय की एक रिपोर्ट को गलत तर्क देते हुए कुछ चैनलों ने बहस छेड़ दी जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है और देश में दो समुदायों के बीच बंटवारे के बीज बोए जा रहे हैं।
इन चैनलों की रिपोर्टिंग में साफ दिख रहा था कि सुप्रीम कोर्ट का याकूब को लेकर फैसला गलत है।
चैनल दिखा रहे भड़काऊ कंटेंट
मंत्रालय को लगता है कि इन चैनलों से इस मसले पर सवाल पूछे जाने चाहिए। चैनलों पर आरोप है कि उन्होंने ऐसे कंटेंट को दिखाया जो राष्ट्रपति,न्यायपालिका के खिलाफ होने के साथ ही दंगा भड़काने योग्य था।
मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है जिसमें उसने दो चैनलों के खिलाफ आरोप तय कर लिए हैं,इन दो हिंदी चैनलों ने दाऊद का गुर्गे छोटा शकील के इंटरव्यू को दिखाया था।
इसमें वह सरकार और न्यायपालिका के खिलाफ अपशब्द बोलता सुना जा सकता था। वहीं एक चैनल ने याकूब को फांसी दी जाने की घटना को बदकिस्मती करार दिया।
वहीं एक अन्य चैनल में वकील माजिद मेमन भारतीय न्यायपालिका पर सवाल उठाते नजर आते हैं। उसमें वह उस्मान जान खान को माफी दिए जाने पर न्यायपालिका पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि अगर आप इस मामले में रियायत दिखा सकते हो तो यूके,यूएस में या अन्य देश क्रिमिनल लॉ को लेकर भारत पर हंसते नजर आएंगे। उस्मान की भूमिका धमाकों में याकूब से 10 गुना ज्यादा थी।