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महज 33 फीसदी मुस्लिम आबादी के हाथों को मिला काम

Mon, 04 Jan 2016 04:24 PM IST
Updated Mon, 04 Jan 2016 04:24 PM IST
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Only 33 percent Muslims are work

आजादी के छह दशक बाद भी देश में मुसलमानों की क्या स्थिति है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महज 33 फीसदी मुस्लिम आबादी के हाथों को काम मिला है। बाकी 67 फीसदी मुसलमान बेराजगारी में जी रहे हैं और किसी तरह दो जून की रोटी का बंदोबस्त कर रहे हैं।देश में पहली बार धार्मिक आधारित पर कामकाज के आंकड़े सार्वजनिक किए गए हैं।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक 2011 की जनगणना के बाद धर्म आधारित कामकाज के जारी आंकड़ो के अनुसार देश में कुल मुस्लिम आबादी का 33 फीसदी हिस्सा की कामकाज करता है। जबकि देश का राष्ट्रीय औषत 40 प्रतिशत है। जैन और सिख समुदाय 36-36 प्रतिशत काम करता है।
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आंकड़ो के मुताबिक सर्वाधिक 43 फीसदी कामकाजी लोग बौद्घ धर्म के हैं, जबकि हिंदुओं की आबादी सबसे अधिक है। बौद्ध धर्म को अपनाने वालों में ज्यादातर दलित हैं।
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हिंदुओं की बात करें तो 41 प्रतिशत हिंदू कामकाजी हैं। 48.20 करोड़ लोग रोजीरोटी के लिए काम कर रहे हैं। यह आंकड़ा कुल आबादी का 40 फीसदी हिस्सा है।

आधा से ज्यादा आबादी बेरोजगार

Only 33 percent Muslims are work

आंकड़ो पर नजर डालें तो 55 प्रतिशत लोग खेती कार्य यान‌ि कि कृषि से जुड़े हैं जबकि 41.2 प्रतिशत इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर में काम करते हैं। 53 प्रतिशत पुरूष और 27 प्रतिशत महिलाएं काम करती हैं।

वहीं मुस्लिम और सिखों में 12-12 फीसदी महिलाएं काम करती हैं। हिंदुओं में 27 फीसदी, ईसाइयो में 31 फीसदी और बौद्धधर्म में 33 प्रतिशत महिलाएं कामकाजी हैं।

देश की कुल आबादी की बात करें तो 41 फीसदी लोग ही कामगार हैं, बाकी 100 में 61 लोग बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं।देश में धर्म आधारित बेरोजगारी के ये आंकड़े 2011 की जनगणना से लिए गए हैं।

आंकड़ो से इस बात का भी पता चला है कि सर्वाधिक 55 प्रतिशत रोजगार कृषि क्षेत्र उपलब्‍ध करा रहा है। सेवा और उद्योंग क्षेत्र से 41 फीसदी रोजगार ही मिल पा रहा है। आंकड़ो पर गौर करें तो 2001 की जनगणना के बाद कुछ खास बदलाव नहीं आया है।

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