भारत में मध्यम वर्ग की संख्या पर बड़ा खुलासा
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भारत में अक्सर राजनेता, अधिकारी या उद्योगपति इस तथ्य का बार-बार उल्लेख करते हैं कि भारत में 26 करोड़ मध्यमवर्गीय लोगों की विशाल जनसंख्या है।
लेकिन जर्मनी की एक संस्था ने हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया है कि भारत में 2.36 करोड़ वयस्क ही ऐसे हैं जो कि मध्यमवर्गीय के फार्मूले में फिट बैठते हैं।
इंडिया स्पेंड ने जर्मनी में मुख्यालय वाले वैश्विक वित्तीय सेवा फर्म क्रेडिट सुइसे की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि वर्ष 2015 में दुनियाभर की 66.40 करोड़ वयस्क आबादी मध्यवर्गीय थी जिनमें से भारत में 2.36 करोड़ वयस्क रहते हैं।
यह दुनिया भर के कुल मध्यमवर्गीयों का महज 3 फीसदी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मध्यमवर्गीयों की पहचान के लिए कोई स्पष्ट पैमाना या परिभाषा नहीं है। इसलिए विभिन्न संस्था अलग-अलग संख्या बताती रहती है।
इस रिपोर्ट में वैसे व्यक्तियों को मध्यमवर्ग में गिना गया है जिसकी एक वर्ष के दौरान 13662 डॉलर -737748 रुपये की संपत्ति रही हो।
इसे यदि मासिक आधार पर बांटा जाए तो यह 61480 रुपये बैठता है।
वर्ष 2005 में मैकिंजी ग्लोबल इंस्टीच्यूट के आए एक अध्ययन में कहा गया था कि भारत में 5 करोड़ व्यक्ति मध्यमवर्गीय हैं। उसमें नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लायड इकोनोमिक रिसर्च के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया था और इसमें साल में दो से दस लाख रुपये कमाने वालों को शामिल किया गया था।
उसी वर्ष विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि यहां 26.40 करोड़ मध्यमवर्गीय हैं। इसमें आमदनी की न्यूनतम सीमा दो डॉलर प्रतिदिन और अधिकतक सीमा 13 डॉलर प्रति दिन रखी गई थी।
आमदनी नहीं, संपत्ति है आधार
क्रेडिट सुइसे की रिपोर्ट में आमदनी नहीं बल्कि उनकी संपत्ति को मूल आधार बनाया गया है। इसने वैसे व्यक्ति को इस सूची में शामिल किया है जिनकी संपत्ति 13662 डॉलर या 737748 रुपये से अधिक थी।
उल्लेखनीय है कि भारतीय लोगों की संपत्ति की वृद्घि की दर पूरी दुनिया में दूसरी सबसे अधिक रही है। इससे पहले चीन का स्थान है।
रिपोर्ट का कहना है भारत की 90 फीसदी से अधिक वयस्क जनसंख्या संपत्ति के हिसाब से निचली श्रेणी में आती है। इनकी संपत्ति 10000 डॉलर से भी कम है। इसमें भारत में असमान संपत्ति के वितरण का भी जिक्र किया गया है।