मिसाल: मंडप में एक तरफ फेरे तो दूसरी ओर निकाह
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मंडप में एक तरफ वेद मंत्रों के साथ साथ फेरे डलवाए जा रहे थे तो दूसरी ओर निकाह कराया जा रहा था।
ये नजारा था रविवार को कस्बे में जनकल्याण संस्था के सातवें सामूहिक विवाह समारोह का। 46 गरीब हिंदू-मुस्लिम कन्याओं के विवाह कराए गए।
अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने की बरसी को हिंदू संगठन शौर्य दिवस तो दूसरी ओर मुसलिम संगठन काला दिवस के रूप मनाते हैं, इससे इतर यह संस्था इस दिन गरीब हिंदू-मुस्लिम कन्याओं का सामूहिक विवाह कराती है।
लक्ष्मीकांत वाजपेयी बने आयोजन के गवाह
रविवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी इस समारोह में आर्शीवाद देने पहुंचे।
समारोह में 46 हिंदू-मुसलिम जोड़े इस समारोह में शादी के बंधन में बंध गए। सभी धर्मों से जुड़े लोगों ने इस समारोह में शिरकत की, किसी ने तो मिठाई बांटी तो किसी ने मेवा।
सुबह नौ बजे बारात इटावा रोड स्थित क्षत्रिय धर्मशाला से शुरू हुई और विजय चौक होते हुए महाराजा गार्डन प्रांगण में पहुंची। माथुर वैश्य महिला इकाई ने प्रार्थना गाकर कार्यक्रम शुरू ही किया। मंच पर वर कन्याओं को जयमाला पहनाई।
कौमी एकता की मिसाल
कसबा जसराना से आए हाजी इशरत इलाही ने मुस्लिम परिवार की नौ युवतियों का निकाह कबूल कराया। विवाह समारोह में न सिर्फ कन्याओं के परिवारीजनों के साथ कस्बे भर में उत्साह देखा गया।
सैंकड़ों की संख्या में कस्बे की महिलाओं ने नव दंपतियों के मंडप में पैर पूजे और कन्यादान की रस्म पूरी की। किसी ने कन्याओं को गर्म शाल तो किसी ने चांदी का सिक्का भेंट किया।
पूर्व मंत्री जयवीर सिंह के पुत्र अतुल प्रताप सिंह जनकल्याणम सेवा संस्थान के संयोजक है। जयवीर सिंह ने बताया कि छह दिसंबर के दिन लोग हिंदू-मुस्लिमों के बीच खाई खोदने का कार्य करते हैं। ऐसे में इस दिन उन्होंने दोनों समुदाय के लोगों को जोड़ने के लिए इस आयोजन की पहल की।