मोदी के जयापुर में एक और 'क्रांति', पढ़ें ये किस्सा
प्रधानमंत्री का गोद लिया गांव जयापुर इतना बदला कि बच्चों को भी भाने लगा। साक्षी, पलक, मोहित, सावन, निखिल.. ये है जयापुर की किड्स ब्रिगेड। कोई नर्सरी का छात्र है तो कई कक्षा चार का, मगर सबकी आपस में गहरी दोस्ती है। दोस्ती की वजह है गांव में लगा नया झूला।
इनमें से कोई भी अबकी गर्मी की छुट्टियों में अपने नाना या मामा के यहां नहीं जाना चाहता। वजह पूछने पर कहते हैं, वहां न तो ऐसा झूला मिलेगा और न ऐसी चहल-पहल। ...और अब तो मेरा गांव देखने मौसी के बच्चे खुद ही आ गए।
गांव अगर बदल जाएं तो उन्हें कोई नहीं छोड़ना चाहेगा। कम से कम बच्चों का ये मामला तो यही कहता है। गांव में आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर दो झूले और एक रैंप लगाया गया है। जब से यह झूला लगा है, बच्चों की तो मानो चांदी हो गई है। जब भी मौका मिलता है घर से भागकर सभी यहां पहुंच जाते हैं। झूले दो हैं और झूलने वाले ढेरों, सो यहां नंबर लगता है।
मोहित, सावन और पायल किड्स ब्रिगेड के सबसे जूनियर सदस्य हैं। कक्षा तीन में पढ़ने वाले निखिल टीम लीडर हैं। गर्मी की छुट्टियों के बारे में पूछने पर कहते हैं, राजातालाब में मामा का घर है। हर साल स्कूल बंद हो जाने के बाद अम्मा मुझे मामा के यहां भेज देती थीं मगर अबकी मैं नहीं जाऊंगा। क्योंकि अब झूला और ‘फिसलने वाला’ यहीं लग गया है।
बच्चों को पसंद आया मोदी अंकल का तोहफा
इन बच्चों की बातों से तो एक बात तय है कि अबकी गर्मी की छुट्टियों में गांव बच्चों से गुलजार रहेगा। जानकी और चांदनी ने तो अपनी मौसी की लड़कियों को गांव में ही बुला लिया है। शाम के चार बजते-बजते आंगनबाड़ी केंद्र के पास बच्चों की धमाचौकड़ी शुरू हो जाती है। हैंगिंग और स्टैंडिंग झूले के साथ ही पारंपरिक सीढ़ी और रैंप भी है। चोट से बेफिक्र बच्चे यहां खूब मस्ती कर रहे हैं। बच्चों को मोदी अंकल का तोहफा खूब पसंद आ रहा है।
'जयापुर की तस्वीर बदल चुकी है। बच्चे हों या बड़े-बुजुर्ग अब कोई भी गांव छोड़कर नहीं जाना चाहता है। गली-चौराहे से लेकर चट्टी-चौपाल तक गुलजार हैं। पूर्व के सालों में बच्चे गर्मी की छुट्टियां होते ही अपने ननिहाल या रिश्तेदारों के यहां घूमने चले जाते थे मगर तमाम घरों से सुनने में मिल रहा है कि इस बार बच्चे छुट्टी में कहीं बाहर नहीं जाना चाहते।'
--दुर्गावती देवी, ग्राम प्रधान
'प्री स्कूल एजूकेशन को प्रोत्साहित करने के लिए ही आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। यहां तीन से छह साल के बच्चों को मुफ्त पढ़ाया जाता है। रहा सवाल जयापुर के आंगनबाड़ी केंद्र का तो वाकई यह प्रदेश का मॉडल केंद्र है। ऐसे ही केंद्र हर गांव में होने चाहिए ताकि बच्चों में यहां आने का आकर्षण पैदा हो। तभी सही मायने में यह योजना सफल होगी।'
--नीलू मिश्रा, सुपरवाइजर, समन्वेकित बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार