एक और गीता...दुआ कीजिए मिल जाए परिवार
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जिस तरह भारत की गीता पंद्रह साल पहले भटक कर सरहद पार पाकिस्तान पहुंच गई थी। ठीक उसी तरह मुरादाबाद की गीता छह साल पहले अपने परिवार से बिछड़ गई थी। किस्मत उसे रायबरेली के महिला आश्रम में ले गई।
दो बार वह अपनों की तलाश में मुरादाबाद आ चुकी है। लेकिन परिवार नहीं मिल पाया। कोर्ट का आदेश मिलते ही आश्रम की टीम दोबारा उसे लेकर मुरादाबाद आएगी। दुआ कीजिए, इस बार मुरादाबाद की गीता को भी अपना परिवार मिल जाए। उसकी वर्षों की तलाश खत्म हो जाए और उसकी जिंदगी में खुशियां लौट आएं।
छह साल पहले बारह वर्षीय गीता एटा में भीख मांगते हुए पुलिस को मिली थी। गीता ने पुलिस वालों को बताया कि वह मुरादाबाद की रहने वाली है। मां का नाम कमलेश और पिता को नाम संतोष है, जबकि भाई कहर सिंह और वीरेश लाल हैं। दो बहनें लक्ष्मी और मीना हैं।
फिर जगी गीता का परिवार मिलने की उम्मीद
एटा पुलिस उसे लेकर मुरादाबाद आई थी। लेकिन उसका परिवार नहीं मिल पाया था। तब गीता को कानपुर नारी निकेतन भेज दिया गया। बालिग होने पर गीता को कोर्ट के आदेश पर कुछ दिन पहले ही रायबरेली के महिला आश्रम भेजा गया था।
इसके बाद आश्रम की टीम गीता को लेकर मुरादाबाद आई, लेकिन इस बार भी सफलता नहीं मिल पाई थी। अब गीता बार बार आश्रम के कर्मचारी और प्रभारी से पूछती है कि उसके परिवार का कुछ पता चला क्या। गीता ने कहा कि इस बार फिर से उसे मुरादाबाद भेजा जाए।
आश्रम प्रभारी ने कोर्ट ने इजाजत मांगी है कि एक बार फिर गीता को मुरादाबाद भेजा जाए। उसे उम्मीद है कि वह अपने परिवार को ढूंढ लेगी। गीता को मुरादाबाद लाने के लिए तैयारी शुरू हो गई हैं। कोर्ट का आदेश मिलते ही टीम मुरादाबाद के लिए रवाना हो जाएगी।