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भारत में छुआछूत: बहुत चौंकाने वाले हैं ये आंकड़े

Sat, 29 Nov 2014 04:07 PM IST
Updated Sat, 29 Nov 2014 04:07 PM IST
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One in four Indians admit to practising untouchability

आज से 64 साल पहले संविधान के द्वारा छुआछूत को खत्म कर दिया गया था लेकिन अभी भी एक चौथाई भारतीयों से ज्यादा लोग ऐसा करते हैं। अपनी तरह के सबसे बड़े सर्वे से ये बात सामने आई है।

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सर्वे में जिन लोगों ने इस बात को कुबूल किया वो हर धर्म और जाति से हैं। मुस्लिम, एससी और एसटी भी इसमें शामिल हैं। सर्वे के मुताबिक छुआछूत को सबसे ज्यादा ब्राह्मण मानते हैं और यदि धर्म की बात करें तो हिंदू, सिख और जैन धर्म में भी ये फैला हुआ है।
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एनसीएईआर और मैरीलैंड विश्वविद्यालय के द्वारा इस सर्वे को पूरे भारत में कराया गया है। सर्वे के दौरान 42 हजार घरों में बात की गई। एनसीएईआर की स्थापना 1956 में की गई थी और ये भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा नॉन प्रॉफिट इकॉनामिक पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट है।
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इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक ये नतीजे इंडिया ह्यूमन डवलपमेंट सर्वे का हिस्सा हैं जो साल 2011-12 में किया गया था। सर्वे के पूरे नतीजे 2015 में मिल सकेंगे।

हर जाति मानती है छुआछूत

One in four Indians admit to practising untouchability

सर्वे करने वालों ने पूछा कि,"क्या आपका परिवार छुआछूत में विश्वास रखता है?" ना में जवाब मिलने पर दूसरा प्रश्न पूछा गया कि,"क्या आप इस बात की इजाजत देंगे कि कोई अनूसूचित जाति का व्यक्ति आपकी रसोई में जाकर आपके बर्तनों को इस्तेमाल करे?"

भारत भर में 27 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे किसी ना किसी रूप में छुआछूत को मानते हैं और ये सबसे ज्यादा ब्राह्मणों में (52 प्रतिशत) फैली हुई है। अगड़ी जातियों में भी 24 प्रतिशत लोग छुआछूत करते हैं। ओबीसी में 33 प्रतिशत, एससी में 15 प्रतिशत और एसटी में 22 प्रतिशत लोग छुआछूत को मानते हैं।

अगर धर्म की बात की जाए तो 30 प्रतिशत हिंदू, 23 प्रतिशत सिख, 18 प्रतिशत मुस्लिम और पांच प्रतिशत ईसाई छुआछूत को मानते हैं। इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं जैन (35 %) जो ये खुल कर मानते हैं कि वो छुआछूत में यकीन रखते हैं।

हर राज्य में है छुआछूत

One in four Indians admit to practising untouchability

सर्वे के मुताबिक मध्यप्रदेश के 53 प्रतिशत लोग छुआछूत में भरोसा रखते हैं। हिमाचल प्रदेश में 50 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 48 प्रतिशत, राजस्थान और बिहार में 47 प्रतिशत, यूपी में 43 प्रतिशत और उत्तराखंड में 40 प्रतिशत लोग छुआछूत में यकीन रखते हैं।

पश्चिम बंगाल भारत का सबसे प्रोग्रेसिव राज्य है जहां मात्र एक प्रतिशत लोग ही छुआछूत को मानते हैं। केरल में दो प्रतिशत, महाराष्ट्र में चार प्रतिशत, नॉर्थ ईस्ट में सात प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 10 प्रतिशत लोग छुआछूत में यकीन करते हैं।

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