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केबीसी में जीतने के बाद जागी और जीने की इच्छा

Wed, 22 Oct 2014 10:27 PM IST
मेघा पाटिल/केबीसी प्रतियोगी
मेघा पाटिल/केबीसी प्रतियोगी Updated Wed, 22 Oct 2014 10:27 PM IST
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one crore winner of kbc is a cancer patient

मुझे नहीं पता कि मैं कितने दिन और जिंदा रहूंगी। मेरा शरीर मुझे बहुत तकलीफ देता है। मैंने एक करोड़ रुपए अभी जीते हैं। मैं इतनी जल्दी नहीं मरना चाहती।

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अपनी बेटी की शादी देखनी है। बेटे को कामयाबी पाते देखना चाहती हूं।

साल 2006 में मुझे स्तन कैंसर का पता लगा। डॉक्टरों ने बताया कि मैं छह महीने से ज्यादा जिंदा नहीं रहूंगी।

लेकिन मेरे पति ने कह दिया, "तुम टेंशन मत लो। मैं हूं ना।"

तब से लेकर मेरे इलाज में 35 लाख रुपए खर्च हो चुके है।

कैंसर का दूसरा हमला

one crore winner of kbc is a cancer patient

जब मैं उससे उबरने लगी तो पता चला कि मुझे लिवर कैंसर भी हो गया है।

मुझे नहीं पता कि और कितना पैसा लगेगा। और मैं बचूंगी भी या नहीं। हालांकि पैसे जीतने के बाद इलाज के लिए लिया गया उधार अब हमने चुका दिया है।

मेरे पति ने मेरे लिए कैंसर को बड़ी मामूली सी चीज बना दिया।

उन्होंने तमाम आर्थिक तंगी के बावजूद मुझे ये महसूस नहीं होने दिया कि मुझे कोई गंभीर बीमारी हुई है।

उन्हीं की वजह से मेरी इच्छाशक्ति इतनी मजबूत बन सकी। मैं घर पर ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हूं।

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'बेटी को पढ़ाने के लिए जिंदा रहना चा‌हती हूं'

one crore winner of kbc is a cancer patient

केबीसी में हिस्सा लेने के लिए मेरे बेटे ने मुझे प्रेरित किया।

मैं खूब किताबें पढ़ने लगी। पिछले साल भी मैंने काफी कोशिश की लेकिन शो में शामिल नहीं हो पाई।

इस साल मुझे हॉट सीट तक पहुंचने का मौका मिला, जिसका मैंने फायदा उठाया।

खुद अमिताभ बच्चन मेरे हौसले को देखकर प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके।

मैं अपनी बेटी को आर्किटेक्ट बनाना चाहती हूं। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि मैं ज‌िंदा रहूं।

हौसला और इच्छाशक्ति की मेरे पास कोई कमी नहीं है। मेरा परिवार मेरे साथ है। अब मुझमें दोबारा जीने की इच्छा जाग पड़ी।

इनाम तो जीत लिया। बस जिंदगी के थोड़े दिन और चाहती हूं।

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