राहुल नहीं, हेलिकॉप्टर जुटा रहा भीड़
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दिल्ली के क़रीब ग़ाज़ियाबाद में पिछले सप्ताहांत आयोजित कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक जनसभा में आए दो दोस्त कहते हैं, ''हम हेलिकॉप्टर देखने आए हैं। ''
रैली में आई भीड़ में कोई उत्साह नहीं था। अन्य वक्ता लोगों में उत्साह भरने की कोशिश कर रहे थे लेकिन जनसभा में शामिल कुछ लोग ऊंघ रहे थे।
यह कुछ दिन पहले राहुल गांधी के मुख्य प्रतिद्वंदी नरेंद्र मोदी की दिल्ली में आयोजित रैली से बिल्कुल अलग थी, जहां उनके आने से घंटों पहले से ही मोदी के समर्थक पूरे उत्साह से उनके नाम की जय-जयकार कर रहे थे।
हेलिकॉप्टर की गर्जना सुन आए लोग
लेकिन जैसे ही ग़ाज़ियाबाद के आसमान में हेलिकॉप्टर ने गर्जना भरी, जनसभा में मौजूद लोगों में उत्साह का संचार हो गया।
हेलिकॉप्टर को ठीक से देखने के लिए कांग्रेस के समर्थक कुर्सियों पर उछल रहे थे। आसपास की छतें स्थानीय लोगों से भरी हुई थीं, जो कि हेलिकॉप्टर को उतरते हुए देखना चाहते थे।
लेकिन जब राहुल गांधी ने बोलना शुरू किया तो भीड़ छंटने लगी। वह मिश्रित शहरी निर्वाचन क्षेत्र में विपक्ष के गढ़ में थे, जहां से मोदी की पार्टी भाजपा के एक वरिष्ठ नेता सांसद हैं।
कांग्रेस के चुनावी चेहरे में दाढी़ समस्या
गांधी परिवार के इस नए वंशज के लिए कांग्रेस के मोर्चे पर निराशाजनक शुरुआत थी, जिसकी छवि एक दशक तक सत्ता में रहने की वजह से पहले से ही ख़राब थी।
कांग्रेस उन्हें अपने प्रचार अभियान का चेहरा बनाने का जुआ खेल रही है। देश को वास्तव में चलाने वाले लोगों की छवि चमकाई जा रही है और इनमें से अधिकांश भ्रष्टाचार के मामलों और चरमराती अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं, इससे कांग्रेस कमज़ोर हुई है।
पार्टी के चुनावी पोस्टरों पर न तो उनकी मां और कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी को और न ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को प्रमुखता से जगह दी गई है। इनमें युवा राहुल गांधी ही हंसते हुए और कई बार बिना दाढ़ी बनाए हुए ही नज़र आते हैं।
विरासत ने नहीं दिया विकल्प
हालांकि पोस्टर में वो मुस्कराते हुए नज़र आते हैं लेकिन कांग्रेस का प्रमुख प्रचारक होने के बाद भी वो व्यक्तिगत रूप से इतने ख़ुश नज़र नहीं आते हैं।
अपने एकमात्र टीवी इंटरव्यू (सांसद बनने के 10 साल में एकमात्र टीवी इंटरव्यू) में उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि वह किसी महत्वाकांक्षा के कारण यह काम नहीं कर रहे हैं लेकिन उनकी विरासत ने उन्हें कोई और विकल्प नहीं दिया।
हालांकि अभी भी वह प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार नहीं हैं, कथित तौर पर उनकी मां ऐसा नहीं चाहती हैं, इसे मोदी ने कांग्रेस की आसन्न हार के प्रमाण के रूप में प्रचारित किया।
वादा कर लूटते वाहवाही
लोगों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी एक दिलकश और लोगों का ख़्याल रखने वाले व्यक्ति नज़र आते हैं। जनसभा में मौजूद कई लोगों में उनके प्रति वास्तव में आकर्षण है।
महिलाओं के लिए अलग से बनी दीर्घा में मौजूद उनकी एक महिला समर्थक कहती हैं, ''हमें उनकी ज़रूरत है क्योंकि वह युवा हैं, क्योंकि वह मंत्रिमंडल के बुज़ुर्गों की तरह नहीं हैं। ''
एक दूसरी समर्थक कहती हैं, ''वह अकेले ऐसे पुरुष नेता हैं, जो महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को समझते हैं।'' महिलाएं उस समय ताली बजाती हैं, जब राहुल गांधी महिला दीर्घा की ओर इशारा करते हुए अपनी रटी रटाई लाइन कहते हैं, ''महिलाओं को जब तक सशक्त नहीं बनाया जाएगा भारत महाशक्ति नहीं बनेगा।''
चुनावी हार गांधी परिवार के लिए खतरनाक
वह भारत की चरमराई शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का वादा करते हैं। राहुल गांधी कहते हैं, ''आज हर चीज़ जो कि चीन में बन रही है, कल वह भारत में बनेगी।''
हालांकि उनकी समस्या यह है कि कांग्रेस के पास यह सब करने के लिए 10 साल थे, हालांकि वह सरकार के प्रभारी नहीं थे।
अगर मई में आने वाले नतीजों में कांग्रेस की हार होती है तो कई लोगों को अनुमान है कि इससे कांग्रेस पर गांधी परिवार की पकड़ समाप्त हो सकती है।