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अफजल गुरू की फांसी पर उमर ने उठाए सवाल

जम्मू/श्रीनगर/नई दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी Updated Sun, 10 Feb 2013 09:37 PM IST
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omar slams execution of afzal guru sense of alienation in youth

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जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी अफजल गुरू को शनिवार को तिहाड़ जेल में दी गई फांसी पर राजनीति शुरू हो गई है। कल तक खामोश रहे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अफजल की फांसी पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है, वहीं आतंकी के परिवार ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उन्हें फांसी की खबर नहीं दी। उन्हें टीवी के समाचार चैनलों से फांसी का पता चला।
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उमर ने अफजल गुरू को फांसी के दूसरे दिन नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने आशंका जाहिर की कि यह फैसला राज्य के लोगों विशेषकर युवाओं की देश से दूरी बढ़ाएगा। उन्होंने अफसोस जताया कि अफजल को आखिरी बार परिवार से मिलने का मौका नहीं दिया गया। उमर ने इसे मानवीय त्रासदी कहा। रविवार को मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अफजल गुरू की फांसी के बाद के नतीजों को लेकर चिंतित हैं।


नाराज उमर ने कहा कि अफजल गुरू की फांसी ने साबित कर दिया कि कश्मीरी अवाम के लिए न्याय नहीं है। उनके मुताबिक भविष्य में इसके नकारात्मक नतीजे सामने आएंगे क्योंकि फांसी के बाद मौजूदा युवा पीढ़ी की अफजल से सहानुभूति होगी। राज्य के लोगों को लगता है कि अफजल को न्याय देने में ईमानदारी नहीं बरती गई।

इस फांसी पर नेशनल कान्फ्रेंस के अधिकारिक दृष्टिकोण पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए था।
उनसे जब पूछा गया कि क्या अफजल गुरू को यूपीए सरकार ने ‘चुन कर’ फांसी दी? तब उनका जवाब था कि यह केंद्र सरकार को कश्मीरियों और विश्व के समक्ष साबित करना होगा कि अफजल को ‘चुन कर’ फांसी नहीं दी गई। उन्होंने इस फांसी को राजनीतिक अधिक और कानूनी कम बताया।

उमर ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारों को अभी तक फांसी नहीं दी गई, ऐसे में अफजल को फांसी देने की जल्दबाजी समझ नहीं आती। उमर ने कहा कि अब राज्य सरकार के सामने पहली चुनौती सुरक्षा व्यवस्था है।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के मुताबिक फांसी की सजा समाज और सोसाइटी की मांग पर नहीं दी जा सकती। उमल के मुताबिक राज्य सरकार ने कसाब की फांसी के बाद अंदाजा लगा लिया था कि अब अफजल गुरू की बारी है। इसलिए उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से कह दिया था कि अफजल को फांसी लगने पर बनने वाली किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहें।

उमर के बोल
- अफजल को फांसी से कश्मीरी युवा वर्ग की देश से दूरी बढ़ेगी।
- यह साबित हो गया है कि कश्मीर अवाम के लिए न्याय नहीं है।
- अफजल को परिवार से आखिरी बार न मिलने देना मानवीय त्रासदी है।
- केंद्र को कश्मीरियों और विश्व के सामने साबित करना होगा कि यह फांसी ‘चुन कर’ नहीं दी गई।
- अफजल को फांसी कानूनी कम और राजनीतिक फैसला ज्यादा है।
- कसाब को फांसी के बाद अंदाजा हो गया था कि अगली बारी अफजल गुरू की है।

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