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एक और सहित्यकार ने लौटाया पद्मश्री, असहिष्णुता का विरोध

Mon, 23 Nov 2015 04:36 PM IST
Updated Mon, 23 Nov 2015 04:36 PM IST
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Odisha poet Jayanta Mahapatra returns Padma Shri

जानेमान कवि और साहित्यकार जयंत महापात्रा ने नैतिक विषमता के विरोध में पद्मश्री पुरस्कार लौटाने की घोषणा की है। जयंत अंग्रेजी भाषा के ख्यातिप्राप्त कवि हैं और ओडिसा के महान साहित्यकारों में गिने जाते हैं।

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असहिष्णुता के मुद्दे पर साहित्यकारों, फिल्मकारों, संस्कृतिकर्मियों, वैज्ञानिकों और उद्योगपतियों के विरोध को प्रायोजित बता रही सरकार को जयंत महापात्रा की घोषणा असहज कर सकती है। पिछले सप्ताह अमेरिका में विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने कहा था कि भारत में असहिष्णुता पर हो रही बहस प्रायोजित और विरोध करने वालों को इसके लिए भारी-भरकम रकम उपलब्ध कराई गई है।
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उन्होंने कहा था कि ये बहस जानबूझकर भाजपा को नुकसान पहुंचाने के लिए बिहार विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई थी। चुनाव समाप्त होते ही बहस समाप्त हो गई है।
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अखलाक की हत्या के बाद शुरू हुआ विरोध

Odisha poet Jayanta Mahapatra returns Padma Shri

जयंत महापात्रा की घोषणा के बाद नैतिक विषमता और असहिष्‍णुता पर नए सिरे से बहस शुरू हो सकती है। जयंत मौजूदा विरोध में पद्म श्री लौटाने वाले चौथे बुद्घिजीवि हैं। राष्ट्रपति को लिखे पत्र में महापात्रा ने लिखा, 'मेरा फैसला एक मामूली कदम भर है। हालांकि मुल्क में बढ़ रही नैतिक विषमता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ‌निजी तरीका है।'

महापात्रा ने कहा मेरी घोषणा को देश का अपमान न माना जाए। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताब‌िक, जयंत महापात्रा ने कहा कि ये एक निजी फैसला है। मैं लंबे समय से ऐसा सोच रहा था, लेकिन कुछ घटनााओं ने मुझे बहुत पीड़ा पहुंचाई, जिसके बाद मैंने पुरस्कार लौटाने का फैसला किया। मुल्क में असहिष्‍णुता पर बहस दादरी में अखलाक की हत्या के बाद शुरू हुई, उसे गोमांस रखने के शक में भीड़ ने मार दिया था।

उन्होंने कहा कि हर दिन ही अखबारों में छप रहा है कि आप ये खा नहीं सकते, आप वो खा नहीं सकते। मैं इन सबसे दुखी हूं। महापात्रा से पहले पंजाबी लेखिका दलीप कौर तिवाड़ा और कन्‍नड़ लेखक देवानुरू माहदेव अपना पद्म श्री सम्‍मान वापस कर चुके हैं। वैज्ञानिक पुष्यमित्र भार्गव भी पद्म भूषण सम्‍मान लौटा चुके हैं।

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