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जरूरी नहीं है आधार कार्ड बनवानाः सुप्रीम कोर्ट
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 23 Sep 2013 08:33 PM IST
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आधार कार्ड नहीं होने पर सेवा या लाभ देने से इंकार करने वाले सभी प्राधिकारों की कारगुजारी पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रोक लगा दी।
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केंद्र सरकार द्वारा आधार कार्ड योजना को स्वैच्छिक बताए जाने के बाद सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि कार्ड नहीं होने की स्थिति में देश के किसी भी नागरिक को परेशानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह एक स्वैच्छिक योजना है।
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जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि किसी भी अवैध विस्थापित को आधार कार्ड नहीं जारी किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस कार्ड को देश के लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए कुछ योजनाओं से जोड़ा गया है। पीठ ने यह निर्देश सॉलिसिटर जनरल मोहन परासरन और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एल. नागेश्वर राव के उस तर्क पर दिया, जिसमें कहा गया कि आधार कार्ड व्यक्ति की नागरिकता का साक्ष्य नहीं है।
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ऐसे में किसी अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं है। दोनों विधि अधिकारियों ने इस पर भी जोर दिया कि आधार का पंजीकरण पूरी तरह से स्वैच्छिक है और किसी भी व्यक्ति को एक से ज्यादा कार्ड नहीं मुहैया कराया जाएगा।
पीठ ने केंद्र से पूछा कि क्या आप अवैध विस्थापितों को भी यह कार्ड मुहैया कराएंगे। आप ऐसा नहीं कर सकते कि गैरकानूनी विस्थापितों को यह सुविधा दें।
क्या आप आधार कार्ड जारी करने से पहले व्यक्ति की ओर से दिए गए कागजात की विस्तार की जांच करते हैं। हम यह स्पष्ट कर देते हैं कि आधार कार्ड अवैध विस्थापितों को नहीं जारी किया जा सकता। इस कार्ड के महज कुछ लाभ हैं जो नागरिकों के लिए हैं।
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल दीवान ने इंगित किया कि सरकार यह दावा कर रही है कि आधार स्वैच्छिक है, लेकिन कई राज्यों में इसे तमाम तरह की औपचारिकताओं जैसे विवाह के पंजीकरण, वेतन और भविष्य निधि को हासिल करने समेत अन्य जन सेवाओं के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
इस दौरान पीठ को बांबे हाईकोर्ट रजिस्ट्रार की अधिसूचना के बारे में भी बताया गया, जिसमें आधार कार्ड के बिना किसी भी कर्मचारी को वेतन व भत्ते नहीं मिलेंगे।
तब सर्वोच्च अदालत ने कहा कि प्राधिकरण आधार कार्ड नहीं होने की स्थिति में नागरिक को किसी सेवा या लाभ से वंचित नहीं करेंगे।
इस पर विधि अधिकारियों ने पूरा पक्ष सुने बगैर निर्देश जारी करने पर आपत्ति जताई। तब पीठ ने कहा कि आपको यह आदेश भला किस तरह प्रभावित करेगा। क्या आप इससे सहमत नहीं कि आधार कार्ड स्वैच्छिक है।
हम भी बस यही कह रहे हैं और स्पष्ट कर रहे हैं कि यह कार्ड अवैध विस्थापितों को नहीं जारी किया जाएगा।
साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि यदि किसी राज्य की ओर से कोई सेवा या लाभ देने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य किया गया हो तो उसके खिलाफ खासतौर पर आदेश जारी करने के संबंध में अलग से आवेदन दाखिल करें।
इस मसले पर कर्नाटक हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस केएस पुत्तास्वामी की ओर से याचिका दायर की गई है, जिसमें आधार योजना की कानूनी वैधता को चुनौती दी गई है।