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चाबुक की तरह प्रहार करती थी वीरेन दा की भाषा

Mon, 28 Sep 2015 06:15 PM IST
दिनेश श्रीनेत/अमर उजाला, नई दिल्ली
दिनेश श्रीनेत/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 28 Sep 2015 06:15 PM IST
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obituary of viren dangwal

वीरेन डंगवाल की खाली जगह को हिन्दी कविता के स्पेस में भरना मुश्किल है। वे शमशेर की तरह एक विशिष्ठ कवि थे। अपनी शैली में जितने अकेले और अनूठे उतने ही विषयों के चयन में। पीटी उषा, समोसा, भाप का इंजन जैसी कविताएँ वीरेन से पहले हिन्दी में नहीं थीं। प्रगतिशील कवि एक अलग किस्म की रूमानियत में जी रहे थे।

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वीरेन की कविताओं ने साधारण जीवन को कविताओं का विषय बना कर इस रूमानवाद को तोड़ा और कविताओं को एक नयी ताजगी दी। यह उनकी कविताओं की ताकत थी की उनको कोट किया जाने लगा। उनकी एक कविता की पंक्तियां अक्सर दुहरायी जाती हैं-
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इतने भले नहीं बन जाना साथी
जितने भले हुआ करते हैं सरकस के हाथी
गदहा बनने में लगा दी अपनी सारी कुव्वत सारी प्रतिभा
किसी से कुछ लिया नहीं न किसी को कुछ दिया
ऐसा भी जिया जीवन तो क्या जिया?

वीरेन की ताकत उनकी भाषा थी। एक ऐसी भाषा जिसमें चाबुक की तरह प्रहार करने की क्षमता थी। ऐसी भाषा जो सारे आडम्बर, झूठ और बनावट को अलग-थलग कर देती थी। हम औरतें उनकी एक ऐसी ही कविता है जो भाषा और प्रचलित काव्य बिम्बों को तोड़ती है।
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रक्त से भरा तसला है
रिसता हुआ घर के कोने-अंतरों में

हम हैं सूजे हुए पपोटे
प्यार किए जाने की अभिलाषा
सब्जी काटते हुए भी
पार्क में अपने बच्चों पर निगाह रखती हुई
प्रेतात्माएँ

हम नींद में भी दरवाज़े पर लगा हुआ कान हैं
दरवाज़ा खोलते ही
अपने उड़े-उड़े बालों और फीकी शक्ल पर
पैदा होने वाला बेधक अपमान हैं

हम हैं इच्छा-मृग

इस कविता का अपना एक सौंदर्यबोध है जो नितांत अलग है। ऐसी भाषा को साधना कठिन है। यह किताबों से नहीं आती, अभ्यास से नहीं आती, यहाँ तक की जीवन से भी नहीं आती। यह आती है जिंदगी की एक गहरी समझ और प्रतिबद्धता से। शायद इसीलिये वे अपने युवा साथियों से इस समझ को विकसित करने के लिए कहते थे।


वीरेन डंगवाल हिन्दी के एक अहम् पत्रकार रहे हैं। खबरों की भाषा को एक नया तेवर देना बहुतों ने उनसे सीखा। कानपुर और बरेली में बतौर सलाहकार सम्पादक उन्होंने बहुत से प्रयोग किये। 'सरकार गई' और 'लालू अंदर' जैसी हैडलाइन तब लोगों को चौंकाती थी। बतौर गद्यकार उनके काम का मूल्यांकन अभी बाकी है। उन्होने अमृत प्रभात में लंबे समय तक कॉलम लिखा।

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