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ओबामा का भारत दौरा, 'पाक-चीन को संदेश'

Sat, 22 Nov 2014 07:42 PM IST
चिंतामणि महापात्रा/प्रोफेसर, जेएनयू
चिंतामणि महापात्रा/प्रोफेसर, जेएनयू Updated Sat, 22 Nov 2014 07:42 PM IST
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obama will be the first president of america as the chief guest of india.

आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा विशेष अतिथि के रूप में भारत आ रहे हैं।

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उनकी इस यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंधों के सुधरने का संकेत तो मिलता ही है, साथ ही एशिया में शांति स्थिरता को लेकर भारत के पड़ोसी देशों को भी संदेश जाता है।

संबंधों में एक लंबे ठहराव के बाद भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। यह चीन के लिए एक संदेश है कि दोनों देशों के संबंधों में जो दरार आ गई थी, वो अब खत्म हो गई है।
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ओबामा और मोदी प्रशासन दोनों ही संबंधों को सुदृढ़ बनाने के लिए तैयार नजर आते हैं। इस बात का संकेत तभी मिल गया था जब पिछले आम चुनावों में मोदी के जीतने पर ओबामा ने टेलीफोन कर उन्हें बधाई दी थी।

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पाकिस्तान, चीन को संदेश

obama will be the first president of america as the chief guest of india.

अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत आगमन से पाकिस्तान को भी संदेश जाएगा कि इस क्षेत्र में स्थिरता के लिए भारत और पाकिस्तान को मिलकर काम करना होगा।

अमेरिका अफगानिस्तान से अपनी फौज हटाने जा रहा है और इससे एक किस्म की अनिश्चितता का माहौल पैदा होने की संभावना है। ओबामा इसीलिए आ रहे हैं कि भारत और अमेरिका के बीच जो कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दे हैं उन पर प्रगति हो।

इस यात्रा से एशिया में शांति और स्थिरता, आतंकवाद, अफगानिस्तान के हालात आदि मुद्दों पर पाकिस्तान, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया को भी एक संकेत जाएगा।

इसलिए गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होना केवल एक सम्मान का मामला नहीं है, बल्कि भारत और अमेरिका मिलकर पूरे एशिया में स्थिरता को लेकर एक साथ काम करेंगे।

पूर्व की सरकार की विदेश निति अस्पष्ट थी, लेकिन जिस तरह मोदी चीन, पाकिस्तान, कश्मीर आदि पर साफ-साफ स्टैंड लेते हैं, उससे अमेरिका में विश्वास पैदा हुआ है कि इस सरकार के साथ संबंध काफी मजबूत हो सकते हैं।

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