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'झगड़ा इस्लाम नहीं इसका गलत इस्तेमाल करने वालों से'

Thu, 19 Feb 2015 11:36 PM IST
Updated Thu, 19 Feb 2015 11:36 PM IST
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obama targeted the isis and other terrorist organization

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की लड़ाई इस्लाम के खिलाफ नहीं है बल्कि उन लोगों के खिलाफ है, जो मजहब का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं।

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ओबामा ने जोर देकर कहा कि आईएसआईएल और अल कायदा जैसे आतंकी संगठन खुद को इस्लाम की रक्षा करने वाला पावन मसीहा बताते हैं क्योंकि वे खुद को सही साबित करने को बेचैन हैं।
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ओबामा ने कहा, ‘हमारी लड़ाई इस्लाम से नहीं है, बल्कि उनसे है जो इसका बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं। जो मजहब की आड़ में हिंसा फैला रहे हैं। आईएसआईएल और अल कायदा सरीखे आतंकी संगठन खुद को सही बताने को बेचैन हैं।
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मुस्लिम समुदाय से किया आगे आने का आह्वान

obama targeted the isis and other terrorist organization

ये आतंकी संगठन खुद को धार्मिक नेता और इस्लाम को महफूज रखने वाले पवित्र योद्धा के रूप में दिखाने की कोशिश करते हैं। आईएसआईएल इसीलिए खुद को इस्लामिक स्टेट कहता है और यह गलत प्रचार करता है कि अमेरिका और आमतौर पर पश्चिमी मुल्कों की लड़ाई इस्लाम के खिलाफ है।

ऐसा करके ही वे लोगों को अपने संगठन के साथ जोड़ते हैं। यही हथकंडा अपना कर यह आतंकी संगठन नौजवानों को कट्टर बनाने की कोशिश करता है।

जरूरत इस बात की है कि मुस्लिम समुदाय से बाहर के लोग आतंकियों की इस बात को खारिज करें कि पश्चिम मुल्क और इस्लाम या फिर आधुनिक जीवन या इस्लाम परस्पर विरोधी हैं।’ यह बात ओबामा ने ‘उग्र आतंकवाद से मुकाबला’ विषय पर व्हाइट हाउस में आयोजित सम्मेलन में कही।

भारत सहित 60 देश कर रहे हैं शिरकत

obama targeted the isis and other terrorist organization

तीन दिन के इस सम्मेलन में भारत सहित 60 से ज्यादा मुल्कों के नेता शिरकत कर रहे हैं। इस सम्मेलन के दूसरे दिन बुधवार को ओबामा ने कहा, ‘हमें इन आतंकी संगठनों की बातों को कतई स्वीकार नहीं करना चाहिए क्योंकि यह झूठ है। न ही हमें इन आतंकियों को मजहबी तौर पर सही कहना चाहिए, जैसा कि वे चाहते हैं।

ये मजहबी नेता नहीं हैं बल्कि आतंकी हैं। मेरा यह भी मानना है कि यह मुस्लिम समुदाय की भी जिम्मेदारी है। आतंकी दुनिया भर में फैली गलत अवधारणा पर निर्भर करते हैं कि वे मुस्लिम आस्था के हक में बोलते हैं और इस्लाम में हिंसा निहित है।

सभ्यताओं में एक तरह का टकराव है। दरअसल जरूरत उग्र आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाने की है। ये आतंकी इस्लाम की नुमाइंदगी नहीं करते बल्कि वे ऐसे सिरफिरे हैं जो खुदा के नाम पर नाम बेगुनाहों की हत्या करते हैं।’

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