अब चीन और रूस को मनाने में जुटा भारत
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अमेरिका के साथ अपनी दोस्ती के नए अध्याय के सूत्रपात से असहज हुए चीन और रूस को मनाने की मुहिम में भारत जुट गया है। इन्हीं कोशिशों के तहत विदेश मंत्री सुषमा स्वराज शनिवार को चीन के दौरे पर जा रही हैं।
इसके बाद खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई में चीन और इसके कुछ वक्त बाद रूस की यात्रा करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की यात्रा से भारत के सामने नई कूटनीतिक चुनौतियां आ खड़ी हुई हैं।
दोनों देशों के बीच बढ़ती गर्मजोशी से परेशान चीन से जहां नकारात्मक बयान सुनने को मिले, तो यूक्रेन के मामले में भारत की सरजमीं से ओबामा की ओर से मिली चेतावनी रूस को पसंद नहीं आई है।
भारत की मुश्किल यह है कि संयुक्त राष्ट्र संघ में स्थायी सदस्यता और परमाणु क्लब में शामिल कराने के ओबामा के वादों की राह में ये दोनों देश बाधा खड़ी कर सकते हैं। ये दोनों संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ ही परमाणु देशों के एलीट क्लब में पहले से हैं।
पीएम मोदी भी जाएंगे चीन और रूस
विदेश मामलों के विशेषज्ञ भी ओबामा की ओर से मिले वादों को अमलीजामा पहनाने के लिए रूस और चीन को साधे रखने को नई सरकार की बड़ी कूटनीतिक परीक्षा मान रहे हैं।
इन देशों को मनाने की मुहिम में सुषमा के तीन दिवसीय चीन दौरे को अहम माना जा रहा है। इस दौरान दोनों देशों के बीच न केवल द्विपक्षीय वार्ता होगी, बल्कि वह रूस-भारत-चीन के विदेश मंत्रियों की 13वीं त्रिपक्षीय बैठक में भी शिरकत करेंगी।
सुषमा दोनों देशों के विदेश मंत्रियों को साफ संदेश देंगी कि भारत-अमेरिका के बीच बढ़ती नजदीकी का मकसद चीन या रूस के लिए परेशानी खड़ा करना नहीं है।
पहले से तैयार था यात्रा कार्यक्रम
ओबामा के दौरे को लेकर रूस और चीन की नजरें टेढ़ी होने की भनक भारत को पहले से ही थी। यही वजह है कि ओबामा की यात्रा से पहले ही सुषमा के चीन दौरे का कार्यक्रम तैयार कर लिया गया था।
साथ ही प्रधानमंत्री मोदी की चीन और रूस यात्रा के कार्यक्रम को तैयार किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी मई के तीसरे हफ्ते में चीन जाएंगे। इसके बाद उनकी योजना रूस की यात्रा करने की है। पीएम मोदी सुषमा की तैयार की गई जमीन पर इन दोनों देशों को साधने की कोशिशों को आगे बढ़ाएंगे।
मुश्किल खड़ी कर सकता है चीन
भारत-अमेरिका के प्रगाढ़ होते रिश्ते से नाखुश चीन ने एक ओर जहां इसे सतही संबंध करार दिया है, वहीं उसने संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता और परमाणु क्लब में भारत के प्रवेश में अड़ंगा लगाने का संदेश दिया है।
साथ ही नाखुश चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर नए सिरे से विवाद खड़ा कर सकता है। हालांकि रूस ने इस दोस्ती पर खुलकर टिप्पणी नहीं की है, मगर यूक्रेन के मामले में भारतीय मंच से ओबामा की ओर से मिली चेतावनी उसे भी नागवार लग सकती है।
रूस-चीन के नाराज होने का खतरा नहीं उठाया जा सकता
सलमान हैदर, पूर्व विदेश सचिव ने बताया कि कूटनीति में एक के साथ आने और दो के नाराज होने का खतरा नहीं उठाया जा सकता। भारत को चीन और रूस दोनों को संदेश देना होगा कि उसका और अमेरिका का रिश्ता इन दोनों के विरोध पर नहीं टिका है।
चूंकि आने वाले समय में भारत को संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता के साथ-साथ परमाणु क्लब में प्रवेश के लिए इन दोनों देशों की मदद की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में ओबामा की यात्रा के बाद भारत के लिए चीन और रूस को भी साधे रखने के मामले में कूटनीतिक परीक्षा देनी होगी।