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168 सैन्य कर्मियों पर कोर्ट मार्शल की तलवार

Tue, 26 Mar 2013 12:57 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Tue, 26 Mar 2013 12:57 AM IST
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nyoma clash: army coI recommends displinary action against 168

लद्दाख के न्योमा में पिछले साल सेना के जवानों और अधिकारियों में हुए आपसी संघर्ष के मामले में 168 के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

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इनमें यूनिट के तत्कालीन कमांडिंग अफसर समेत 21 अधिकारी शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि यदि इन 168 सैन्य कर्मियों के खिलाफ समरी ऑफ एविडेंस में भी पुख्ता सुबूत मिलते हैं तो इनका कोर्ट मार्शल भी किया जा सकता है।
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जम्मू-कश्मीर में न्योमा के पास माहे फायरिंग रेंज में पिछले साल 10 मई को 226 फील्ड रेजीमेंट के अफसरों और जवानों के बीच जोरदार संघर्ष हुआ था। मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए गए थे। सेना के सूत्रों ने बताया कि जांच के बाद चार अधिकारियों और 17 जूनियर कमीशंड अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जबकि 147 जवानों पर कार्रवाई की भी अनुशंसा की गई है।
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बिग्रेडियर अजय तलवार के नेतृत्व में की गई कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के बाद पिछले साल दिसंबर में रिपोर्ट लेह स्थित सेना मुख्यालय को सौंप दी गई थी। इस रिपोर्ट में सैन्यकर्मियों पर आगजनी और हमले के आरोप लगाए गए हैं। न्योमा की फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहे अभ्यास के दौरान यह घटना उस समय हुई थी, जब सेना के एक सहायक को अफसरों ने बेरहमी से पीटा था और अधमरी हालत में पडे़ इस जवान को उन्होंने अस्पताल भी नहीं ले जाने दिया था।

बाद में जवानों का गुस्सा बेकाबू हो गया और अफसरों और जवानों के बीच जमकर घमासान हुआ था। संघर्ष में कमांडिंग अफसर समेत तीन अधिकारी और 226 फील्ड रेजीमेंट के आठ जवान घायल हो गए थे। स्थिति को संभालने के लिए जनरल आफिसर कमांडिंग को इस यूनिट में भेजा गया था। मालूम हो कि जवानों और अफसरों के बीच हुए इस संघर्ष ने सेना की एक बेहद अनुशासित फोर्स होने की छवि को धक्का पहुंचाया था।

क्या था मामला
सूत्रों के मुताबिक न्योमा में अधिकारियों और जवानों का अभ्यास चल रहा था। कुछ महिलाएं (सैन्य अफसरों की पत्नियां) भी बिना उचित अनुमति के वहां मौजूद थीं। सूत्रों के मुताबिक सेना का एक सहायक धोखे से एक शिविर में घुस गया जहां एक महिला नहा रही थी। घबराकर सहायक शिविर से बाहर भाग गया।

दोपहर को लंच के समय इस महिला ने सहायक के शिविर में घुस आने की घटना का खुलासा कर दिया। समझा जाता है कि इसके बाद यूनिट के अफसरों ने इस सहायक को तलब किया और उसे बेरहमी से पीटा। सहायक को अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसी समय अफवाह फैल गई कि जवान मर गया है। इसके बाद यूनिट के जवानों का गुस्सा बेकाबू हो गया और वे अफसरों से भिड़ गए।


कई जगह भिड़े अफसर और जवान
न्योमा की तरह पिछले साल जम्मू-कश्मीर के सांबा में भी 16 कैवलरी के जवान और अफसर आमने सामने आ गए थे, इस मामले में 60 सैन्य कर्मियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। वहीं, गुरदासपुर की 45 आर्मर्ड रेजीमेंट के जवान और अफसर भी भिड़ गए थे।

अब क्या होगा
कोर्ट ऑफ इंक्यावरी के बाद समरी ऑफ एविडेंस की प्रक्रिया शुरू होगी। यदि इसमें कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की सिफारिश को सही पाया जाता है तो आरोपी सैन्य कर्मियों को कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ सकता है।

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