देसी गायों की प्रजाति को बचाने के लिए याचिका
देश में लुप्तप्राय देसी नस्ल वाली गायों को बूचड़खाने भेजने पर पूर्ण पाबंदी लगाने की मांग वाली याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है।
याची का आरोप है कि जैव विविधता को बनाए रखने के लिए देसी गायों को बचाना होगा। इनकी संख्या में निरंतर कमी आ रही है। मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को एडवोकेट अश्विनी कुमार की याचिका पर सुनवाई के बाद राज्यों समेत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
तुरंत उठाना चाहिए कदम
याची और एडवोकेट अश्विनी कुमार ने अपनी दलीलों में कहा कि देसी नस्ल वाली
गायों की देखभाल ज्यादा करनी होती है साथ ही यह दूध भी कम देती हैं।
ज्यादा
दूध की चाहत में लोग जर्सी गायों को तरजीह दे रहे हैं। ऐसी गायों का आयात
भी लगातार बढ़ रहा है। जबकि देसी गायों को बूचड़खानों में भेजा जा रहा है।
जैव विविधता के पक्षों को देखें तो देसी गायों को बचाने के लिए तुरंत कदम
उठाए जाने चाहिए।