NRHM घोटालाः सीबीआई ने मायावती से की गुपचुप पूछताछ
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सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के करोड़ों रुपये के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की है।
यह पूछताछ अति गोपनीय तरीके से उनके दिल्ली स्थित आवास पर 28 सितंबर यानी पिछले सोमवार को ही हो गई। मायावती से उनके कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्रालय को दो भागों में बांटने और इससे संबंधित दो मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमओ) की हत्या के संबंध में कई सवाल किए गए। हालांकि मायावती इस केस में आरोपी नहीं हैं।
सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान मायावती कुछ अहम सवालों के जवाब देने से बचती रहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते किए गए कुछ विवादित फैसलों से अनभिज्ञता भी जाहिर कीं। मायावती के विशेष अनुरोध पर उनके कानूनी सलाहकार और बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्र पूछताछ के दौरान उनके साथ थे।
सूत्रों के मुताबिक, इस घोटाले की जांच कर रही सीबीआई के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीम ने राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को बांटने संबंधी कई तकनीकी सवाल किए।
एनआरएचएम के लिए केंद्र सरकार की ओर से दिए गए करोड़ों रुपये की गड़बड़ी के पीछे इस फैसले की अहम भूमिका थी। सूत्रों ने बताया कि डीआईजी एनएम सिंह की अगुवाई में सीबीआई की टीम मायावती के दिल्ली स्थित निवास पर सुबह ही पहुंच गई थी।
टीम में एक महिला डीएसपी शहनाज खान के अलावा एसपी अशोक बाबू, डीएसपी पीएस जामवाल भी शामिल थे।
मायावती ने एनडीए पर फंसाने का लगाया आरोप
गौरतलब है कि सीबीआई की तरफ से फोन जाने के एक दिन बाद 22 सितंबर को मायावती ने एनडीए सरकार पर उन्हें चार साल बाद इस मामले में घसीटने का आरोप लगाया था।
दरअसल, सीबीआई ने मायावती को पूछताछ के लिए दिल्ली स्थिति मुख्यालय बुलाया था, लेकिन मायावती की प्रेस कांफ्रेंस के बाद सीबीआई ने अपने कदम खींच लिए। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा ने संयुक्त निदेशक नीना सिंह को पूछताछ कुछ दिनों के लिए टालने का निर्देश दिया था। गौरतलब है कि मायावती इस मामले में अभी तक न तो आरोपी हैं और न ही गवाह।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के बंटवारे पर घिरीं मायावती के कार्यकाल में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के बंटवारे के फैसले को घोटाले की बड़ी वजह माना जा रहा है।
माया सरकार ने विभाग के बंटवारे के साथ जिला परियोजना अधिकारियों के 100 पद भी सृजित कर दिए थे। एनआरएचएम के क्रियान्वयन में इन अधिकारियों की भूमिका सवालों में हैं।
सीबीआई का आरोप है कि विभाग का बंटवारा इसलिए किया गया ताकि एनआरएचएम फंड को सीधे परिवार कल्याण विभाग के अधीन लाया जा सके। यह विभाग तत्कालीन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के पास था। कुशवाहा के खिलाफ पहले की आरोप पत्र
दाखिल हो चुका है।
चारा घोटाले से भी बड़ा है एनएचआरएम घोटाला लखनऊ
यूपी में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत जो खुलेआम धांधली हुई वह सीबीआई की अब तक की सबसे बड़ी जांच बनी हुई है।
सीबीआई के अफसर खुद मानते हैं कि एनआरएचएम घोटाले का आयाम बिहार के चारा घोटाले से कहीं बड़ा है। इसमें सीबीआई अब तक 76 से अधिक मुकदमे दर्ज कर चुकी है जबकि चारा घोटाले में 64 केस थे।
एनआरएचएम घोटाले में बसपा सरकार के कबीना मंत्रियों से लेकर उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत सामने आ चुकी है। डंके की चोट पर नियमों की अनदेखी की गई और मनमाना काम किया गया। बगैर काम कराए भुगतान दिया गया। चुनिंदा कंपनियों व फर्मों से अधोमानक दवाओं से लेकर उपकरण तक खरीदे गए और आठ गुना अधिक भुगतान किया गया।
शिकायत हुई तो जांच भी हुई। जांच में जो तथ्य सामने आए, उसने न सिर्फ राजनैतिक पटल पर बल्कि शासन के स्तर पर भी सबको सकते में ला दिया।