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दुनिया भर में कहीं से भी कर पाएंगे बीएचयू के भारत कला भवन की सैर

Sat, 26 Sep 2015 08:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 26 Sep 2015 08:31 AM IST
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now you can tour bhu's bharat kala bhawan from anywhere in world

दुनिया के अजूबों में शुमार ताजमहल के बाद अब दुनिया भर के लोग काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भारत कला भवन का भी ‘वर्चुअल टूर’ कर सकेंगे। गूगल पर एक क्लिक के बाद यहां की सभी कलाकृतियां, एंटीक्स, पेंटिंग्स और पांडुलिपियां उनकी नजरों के सामने होंगी। दुनिया के किसी भी कोने से लोग भारत कला भवन की सैर कर पाएंगे।

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कंप्यूटर या फिर लैपटॉप पर यहां की सभी गैलरियों के साथ इस पूरे भवन को ऑनलाइन देखा जा सकेगा। इसके लिए जल्द ही गूगल से बीएचयू का करार होने वाला है। मौजूदा समय में देश-विदेश के तमाम संग्रहालयों के अलावा आगरा के ताजमहल का 360 डिग्री मूवमेंट वाला ‘वर्चुअल टूर’ काफी लोकप्रिय हो रहा है।
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‘वर्चुअल टूर 360 डिग्री’ की इस कड़ी में अब बीएचयू के भारत कला भवन का भी नाम जुड़ने वाला है। भारत कला भवन विश्व भर में मशहूर है। इसलिए दुनिया भर के लोगों को इसका ‘वर्चुअल टूर’ कराकर देशी-विदेशी पर्यटकों को लुभाने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है।
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गूगल ने जताई सहमति

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इसकी शुरुआत जून 2014 में भारत कला भवन के निदेशक प्रो. एके सिंह ने की। उन्होंने गूगल से वार्ता की। प्रो. एके सिंह के मुताबिक, फरवरी 2015 में गूगल ने रिस्पांस किया और इस बारे में करार के लिए बात आगे बढ़ी।

अब गूगल कल्चरल इंस्टीट्यूट ने करार के लिए सहमति जता दी है। बस गूगल और भारत कला भवन के बीच एमओयू पर साइन होना रह गया है।

जैसे ही ये प्रक्रिया होती है, इस पर काम शुरू हो जाएगा। गूगल की टीम इसके लिए जल्द ही यहां आएगी। इसका सारा खर्च गूगल वहन करेगा। हमारी शर्त बस इतनी होगी कि गूगल पर दिखाए जाने वाले वीडियो और फोटो को डाउनलोड नहीं किया जा सकेगा।

ये है भारत कला भवन

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पद्म विभूषण राय कृष्णदास ने भारत कला भवन की स्थापना 1920 में सबसे पहले गोदौलिया के एक छोटे से  कमरे में ‘भारतीय ललित कला परिषद’ नाम से की।

गोदौलिया के एक छोटे से कमरे से सेंट्रल हिंदू स्कूल, क्वींस कालेज, नागरी प्रचारिणी सभा होते हुए यह संग्रहालय मालवीय भवन बीएचयू पहुंचा। इसके बाद यहां भव्य भारत कला भवन की स्थापना की गई।

आज यहां एक लाख से अधिक कलाकृतियां संग्रहीत हैं। इनमें अनमोल सिक्के, मुहरें, मनके, मूर्तियां, टेराकोटा, पुराने गहने, महत्वपूर्ण दस्तावेज, दुर्लभ पांडुलिपियां और साहित्यकारों के पत्र आदि शामिल हैं।

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